Govardhan Puja 2021. अगर आप पहली बार गोवर्धन पूजा कर रहे हैं और आपको पूजा की तिथि और विधि के बारे में नहीं पता तो परेशान मत होइए। हम आपको गोवर्धन पूजा की तिथि और विधि के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी देंगे।
नई दिल्ली। Govardhan Puja 2021. आज देशभर में गोवर्धन पूजा यानि की अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर विशेष रूप से गाय, बछड़े, बैल और घर के पालतू पशुओं की पूजा की जाती है। यह दिन गिरिराज गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने मथुरावासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। यही वजह है कि इस दिन नई फसल के अनाज और सब्जियों को मिलाकर अन्न कूट का भोग बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है।
क्यों मनाया जाता है त्योहार
बता दें कि गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण के द्वारा इंद्रदेव का अंहकार दूर करने के स्मरण में गोवर्धन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है। दरअसल, यह एक तरह का पकवान होता है, जिसे अन्न और सब्जियों को मिलकर बनाया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है। गोवर्धन की पूजा करके लोग प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
कब है गोवर्धन पूजा की तिथि
इस बार गोवर्धन पूजा 5 नवंबर यानि आज की जाएगी। वहीं अगर पूजा के लिए तिथि की बात करें तो कार्तिक मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानि 05 नवंबर 2021 को सुबह तड़के 02 बजकर 44 मिनट से कार्तिक मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 05 नवंबर 2021 को रात्रि 11 बजकर 14 मिनट तक गोवर्धन पूजा की तिथि है। इस दौरान श्रद्धालु पूजन कर सकते हैं।
यहां जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त
वहीं पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की बात करें तो अगर आप सुबह पूजा करना चाहते हैं तो सुबह 06 बजकर 35 मिनट से 08 बजकर 47 मिनट के बीच पूजा के लिए अच्छा मुहूर्त है। लेकिन अगर आप शाम को पूजा करना चाहते हैं तो 03 बजकर 21 मिनट से 05 बजकर 33 मिनट के बीच आप गोवर्धन पूजा कर सकते हैं।
अगर आप पहली बार गोवर्धन पूजा करने जा रहे हैं और आपको पूजा विधि नहीं पता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपको गोवर्धन पूजा की पूरी विधि विस्तार से बताएंगे। इस दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना होगा। इसके बाद शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति, और गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनानी चाहिए। फिर धूप-दीप आदि से विधिवत पूजन करना चाहिए। भगवान कृष्ण को दुग्ध से स्नान कराने के बाद उनका पूजन भी करें इसके बाद भगवान कृष्ण और गोवर्धन को अन्नकूट का भोग लगाएं।