
IRCTC Hotel Scam: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजद प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने इस मामले में सात आरोपियों को बरी कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, सुजाता होटल्स समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले में सामने आए आरोपों और जांच से जुड़े पहलुओं पर भी टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ हुई जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित थी, ऐसा प्रथम दृष्टया नहीं लगता। अदालत ने लारा प्रोजेक्ट्स को कथित तौर पर मिले लाभ का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, कंपनी को जिस तरह कथित लाभ मिला, उससे लालू यादव की भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है। इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को इसी अदालत ने सीबीआई के मामले में लालू यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में आरोप तय किए थे। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी समेत कई आरोप तय किए गए थे।
सीबीआई का आरोप है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो होटलों का संचालन सुजाता होटल्स को कथित रूप से हेरफेर वाले टेंडर के जरिए लीज पर दिया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बदले करोड़ों रुपए की जमीन बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर ऐसी कंपनी को हस्तांतरित की गई, जिसका संबंध राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से बताया गया है।
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने बाद में पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। ईडी ने इस मामले में कथित लेन-देन और उससे जुड़े धन के स्रोत की जांच की। यादव परिवार लगातार इस मामले को राजनीतिक साजिश बताता रहा है। परिवार का कहना है कि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और मामला राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ाया जा रहा है। मामले में सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह ने पैरवी की। लालू यादव और उनके परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह समेत अन्य वकील अदालत में पेश हुए।