नई दिल्ली

20 करोड़ मुसलमानों की ‘घर वापसी’, मोहन भागवत के बयान पर मदनी का करारा पलटवार…देश में हिंसा कराने का लगाया आरोप

Mohan Bhagwat: मोहन भागवत के मुसलमानों की ‘घर वापसी’ संबंधी बयान के बाद देश में सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमान धर्म के आधार पर जिंदा हैं और आगे भी रहेंगे।

2 min read

Mohan Bhagwat: मोहन भागवत द्वारा मुसलमानों की घर वापसी पर दिए गए बयान से देश में चर्चा का माहौल बना हुआ है। अब उनके बयान पर पलटवार करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि मुसलमान धर्म के बल पर जिंदा हैं और आगे भी जीवित रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने RRS प्रमुख के बयानों की निंदा भी की।

आपको बता दें कि बुधवार को मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए भागवत के बयानों पर पलटवार किया। पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि 20 करोड़ मुसलमानों के लिए ‘घर वापसी’ आयोजित करने को लेकर दिया गया बयान बीते 70 वर्षों में न सिर्फ अभूतपूर्व है, बल्कि बेहद गंभीर और चिंताजनक भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की बयानबाजी देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाली है। मदनी ने कहा कि जो भी आवाज देश को विनाश, अशांति, अव्यवस्था और आपसी वैमनस्य की ओर धकेलती है, उसे किसी भी सूरत में राष्ट्रभक्ति की आवाज नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, ऐसे बयान समाज में डर और विभाजन पैदा करते हैं, जो देश की एकता और शांति के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

ये भी पढ़ें

Unnao Custodial Death Case: कुलदीप सिंह सेंगर और सीबीआई समेत सभी दोषियों को नोटिस, सजा बढ़ाने की मांग पर कोर्ट सख्त

70 साल में कोई पैदा नहीं हुआ- मदनी

मोहन भागवत को करारा जवाब देते हुए मदनी ने लिखा कि जो बातें आज हो रही हैं, वो कहने के लिए पिछले 70 साल में कोई पैदा नहीं हुआ था। मदनी ने कहा कि 20 करोड़ मुस्लिमों की 'घर वापसी' कराने के लिए किसी ने अपनी मां का दूध नहीं पिया है। उनका कहना है कि ऐसी बातें कर देश में हिंसा कराने का काम किया जा रहा है। समाज को बांटने की साजिश की जा रही है। इसके साथ ही मदनी ने कहा कि 'धर्म के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी धर्म मानवता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं।'

गौ संरक्षण के नाम पर हत्या

मदनी ने कहा कि गौ संरक्षण के नाम पर मुस्लिम को टारगेट कर उनकी हत्या की जाती है। मदनी ने कहा कि कुछ वर्ग बार-बार यह धारणा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में सिर्फ एक खास विचारधारा को मानने वालों को ही रहने का अधिकार है। उनके अनुसार, इस तरह की सोच न सिर्फ सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है, बल्कि भारतीय संविधान की मूल भावना का खुला उल्लंघन भी है। बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी मानसिकता देश की एकता, अखंडता और शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

Mohan Bhagwat का बयान

मोहन भागवत ने हाल ही में 20 करोड़ मुसलमानों को लेकर दिए गए अपने बयान में कहा था कि “घर वापसी” किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले सभी समुदायों की जड़ें इसी देश में हैं और किसी को डरने की जरूरत नहीं है। भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोगों ने इसे सांस्कृतिक एकता से जोड़कर देखा, तो वहीं कई संगठनों और नेताओं ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर चिंताजनक करार दिया।

ये भी पढ़ें

AI Impact Summit: अब उड़कर जाएंगे ऑफिस, जाम से मिलेगा आराम…हवाई टैक्सी देखकर हैरान हुए लोग

Also Read
View All

अगली खबर