
वक्फ की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश (फोटो सोर्स: एआई)
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (18 फरवरी 2026) को राष्ट्रीय राजधानी के जहांगीरपुरी इलाके में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में मुख्य विवाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर है, जहां एक पक्ष इसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की संपत्ति बता रहा है, वहीं वक्फ बोर्ड इसे अपनी जमीन होने का दावा कर रहा है।
याचिकाकर्ता के वकील उमेश चंद शर्मा ने अदालत में दलील दी कि केंद्र सरकार ने 1977 में जहांगीरपुरी और आसपास के तीन-चार गांवों की जमीन अधिग्रहित की थी। इस जमीन को कॉलोनी विकसित करने के उद्देश्य से डीडीए को सौंपा गया था। हालांकि, 1980 में वक्फ बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी कर दावा किया कि यह क्षेत्र उनका है। शर्मा ने तर्क दिया कि एक बार जब सरकार ने जमीन अधिग्रहित कर ली, तो वह वक्फ की संपत्ति नहीं हो सकती।
अदालत को बताया गया कि विवादित जमीन पर वर्तमान में धार्मिक ढांचे मस्जिद या मकबरा बने हुए हैं और वहां एक बाजार भी चल रहा है। वकील ने सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि ए और बी-ब्लॉक पूरी तरह से सरकारी जमीन है, जिस पर कब्जा किया गया है। फ़िलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
इससे पहले पिछले सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह प्रबंधन समिति की याचिका पर डीडीए को नोटिस जारी किया था। समिति का कहना है कि यह मामला पहले से वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है, इसके बावजूद डीडीए जमीन पर बोर्ड लगाने की कार्रवाई कर रहा है।
समिति ने अदालत से अनुरोध किया कि डीडीए को जमीन पर बोर्ड लगाने से रोका जाए। न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह ने डीडीए से इस पर जवाब मांगा है। हालांकि डीडीए के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले और इससे जुड़े अन्य प्रकरणों की अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है।
Updated on:
19 Feb 2026 03:23 pm
Published on:
19 Feb 2026 03:18 pm
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