
नई दिल्ली। दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी एकबार फिर से सुर्खियों में है। दरअसल, जेएनयू के वाइस चांसलर जगदीश कुमार को लेकर कराए गए जनमत संग्रह में 90 फीसदी से ज्यादा शिक्षकों ने जगदीश कुमार के खिलाफ वोट दिया है और अब स्थिति ऐसी बन गई है कि जगदीश कुमार को उनके पद से हटाया जा सकता है। आपको बता दें कि मंगलवार को जेएनयू में कराए गए जनमत संग्रह में 200 के करीब शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। जनमत संग्रह सुबह 10 बजे से शुरु होकर शाम 6 बजे तक चला था।
93 फीसदी वोट पड़े जगदीश कुमार के खिलाफ
ये जनमत संग्रह कुलपति का विरोध उनकी कथित पक्षपातपूर्ण नीतियों और परामर्श प्रक्रिया का पूरी तरह ध्वस्त होने के कारण कराया गया था। जानकारी के मुताबिक, जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (जेएनयूटीयू) द्वारा कराए गए इस जनमत संग्रह में 93 फीसदी वोट जगदीश कुमार के खिलाफ पड़े हैं। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि बाहरी पर्यवेक्षकों की निगरानी में हुआ यह जनमत संग्रह बताता है कि वर्तमान कुलपति को अपने पद पर नहीं रहना चाहिए।
क्यों कराया गया था जेएनयू में जनमत संग्रह
एसोसिएशन ने कहा ने कहा कि जेएनयू के 586 सूचीबद्ध शिक्षकों में से 300 वोट डालने पहुंचे। उनमें से 279 ने कुलपति को हटाये जाने के पक्ष में वोट डाला। आठ शिक्षकों ने वीसी के समर्थन में वोट किया।
टीचर और छात्रों का वीसी से रहा है विवाद
एसोसिशन ने वर्तमान प्रशासन पर भय का माहौल पैदा करने तथा अकादमिक मुद्दों पर असंतोष प्रकट करने पर खास शिक्षकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है। आपको बता दें कि वाइस चांसलर जगदीश कुमार और टीचर एसोसिएशन के बीच काफी समय से विवाद देखने को मिल रहा है। सिर्फ टीचर ही नहीं बल्कि छात्रों का भी वाइस चांसलर से कई मुद्दों पर विवाद रहा है। वीसी और छात्रों के बीच तनातनी उस वक्त देखने को मिली थी जब जनवरी 2018 में छात्र संगठन ने कुलपति के उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें कैंपस में सभी छात्रों का अटेंडेंस मार्क करने की बात कही गई थी।