नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए हर राज्य में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने के फॉर्मूले पर अब उत्तर-दक्षिण की सियासत शुरू हो गई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्ड ने इस फॉर्मूले को उत्तर भारत खासतौर पर हिंदी बेल्ट को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया है। वहीं कांग्रेस […]
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए हर राज्य में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने के फॉर्मूले पर अब उत्तर-दक्षिण की सियासत शुरू हो गई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्ड ने इस फॉर्मूले को उत्तर भारत खासतौर पर हिंदी बेल्ट को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया है। वहीं कांग्रेस महासचिव व राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने संकेत दिए हैं कि सरकार के सीटों के बढ़ाने का फॉर्मूले को औपचारिक तौर पर सामने लाने पर दक्षिण के साथ पूर्वोत्तर राज्य भी विरोध में सामने आ सकते हैं।
दरअसल, केन्द्र सरकार महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की संभावना तलाश रही है। नई जनगणना के आंकड़ों और इसके चलते होने वाले परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की सीटों के घटने की आशंका के चलते सरकारी सूत्रों ने सभी राज्यों की लोकसभा सीटों को 50 फीसदी तक बढ़ाने का नया फॉर्मूला सामने रखा। अब इस पर कांïग्रेस की ओर से विरोध शुरू हो गया है। तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का कहना है कि महिला आरक्षण तत्काल लागू होना चाहिए, लेकिन सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला सही होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि उत्तर-दक्षिण के राज्यों में वर्तमान सीटों के अंतर को बनाए रखना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया तो दक्षिण के राज्य हाशिये पर जा सकते हैं। इसके अलावा कांग्रेस उत्तर-दक्षिण के उभरते विवाद के अलावा महिला आरक्षण के भीतर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिनिधित्व की मांगों पर सरकार से स्पष्टता की मांग कर रही है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार एक ऐसा बिल लाने का प्रस्ताव कर रही है, जिसके जरिए लोकसभा का आकार 50 ïफीसदी तक बढ़ा दिया जाएगा। हर राज्य को आवंटित सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी का तर्क एक समान बढ़ोतरी, न्यायसंगत कहना भ्रामक है। हो सकता है कि अभी अनुपात न बदलें, लेकिन इसके कुछ गहरे निहितार्थ हैं जिन्हें नजऱअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकसभा में अलग-अलग राज्यों की मौजूदा सीटों की संख्या के बीच का अंतर बढऩे से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा। मोदी एक ऐसा कानून एकतरफ़ा ढंग से तैयार कर रहे हैं, जिससे दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के छोटे राज्यों को नुकसान होगा। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता ज़ाहिर कर दी है। जैसे ही यह प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक होगा, हो सकता है कि दूसरे राज्य भी इसका विरोध करें।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का दावा है कि तेलंगाना में 17 से बढक़र 26 सीटें, तमिलनाडु में 39 से बढक़र 59, केरल में 20 से बढक़र 30, कर्नाटक में 28 से बढक़र 42 और आंध्र प्रदेश में 25 से बढक़र 38 सीटें होंगी। दक्षिण को अधिकतम 66 सीटों का फायदा होगा। वहीं उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों से बढक़र 120, बिहार की 40 से बढक़र 60 सीट हो जाएंगी। इस तरह देखे तो उत्तर भारत के राज्यों को करीब 200 सीटों का फायदा होगा। रेड्डी का कहना है कि वर्तमान में उत्तर और दक्षिण के राज्यों में सीटों का अंतर 63 है, जो बढक़र 94 हो जाएगा।
नए फार्मूले से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु की कुल सीटें 129 से बढक़र 195 हो जाएंगी। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, पंजाब और झारखंड जैसे राज्यों की संभावित वृद्धि से इनका कुल आंकड़ा 471 सीटों तक पहुंच सकता है, जो 816 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के आंकड़े 408 से काफी अधिक होगा। इसके मुकाबले पांचों दक्षिणी राज्यों के पास केवल 195 सीटें होंगी।