2 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को लगाई फटकार, जजों के घेराव पर बोले CJI – बंगाल में सब नेता बन गए हैं

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार है, जिसकी निंदा किसी भी राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी नेताओं को एक साथ मिलकर करनी चाहिए।

3 min read
Google source verification
supreme court slams mamata government judges gherao west bengal

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दौरान न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि सभी राजनीतिक नेतृत्व को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसकी एक सुर में निंदा करनी चाहिए। साथ ही भारत निर्वाचन आयोग को राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती संबंधी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा शीर्ष न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की पीठ ने बुधवार को तीन महिला जजों समेत सात अधिकारियों के घेराव की घटना को प्रशासन की बड़ी विफलता माना है। अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि इस संवेदनशील स्थिति में अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय पूरी तरह मुंह मोड़ लिया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने सभी राजनीतिक नेताओं से एकजुट होकर इसकी निंदा करने की अपील की है और 'भारत निर्वाचन आयोग' को निर्देश दिया है कि वह राज्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'केंद्रीय बलों' की तैनाती करे। सीधे तौर पर, कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए साफ कर दिया है कि न्यायिक गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी DGP, संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही, उन्हें 6 अप्रैल को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

सीजेआई सूर्यकांत हुए नाराज

सीजेआई ने राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता से कहा कि पश्चिम बंगाल में सभी 'राजनीतिक की भाषा' बोलते हैं। यह सबसे ज्यादा ध्रुवीकरण वाला राज्य है। कोर्ट ने कहा, 'यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने के साथ ही यह अदालत के अधिकारों को भी चुनौती देती है। यह कोई आम घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा लगता है कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और बचे हुए मामलों में आपत्ति सुलझाने की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी और इरादतन की गई कार्रवाई थी।'

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, 'हम किसी को भी कानून हाथ में लेने या न्यायिक अधिकारियों के दिमाग पर हमला करने की अनुमति नहीं देंगे… यह पश्चिम बंगाल सरकार का अपनी जिम्मेदारी से भागने जैसा भी है। अधिकारियों को यह कारण बताना होगा कि सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालना क्यों सुनिश्चित नहीं किया।'

कार्रवाई नहीं होने पर जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रशासन के देरी और लापरवाही करने पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि न्यायिक अधिकारियों का घेराव दोपहर 3:30 बजे ही शुरू हो गया था, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट को सूचना दिए जाने के बावजूद घंटों तक जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह रही कि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद भी जिला मजिस्ट्रेट DM और पुलिस अधीक्षक SP मौके पर उपस्थित नहीं हुए, जिसके कारण मुख्य न्यायाधीश को स्वयं राज्य के पुलिस महानिदेशक DGP और गृह सचिव से संपर्क साधना पड़ा। शीर्ष अदालत ने इस बात को बेहद गंभीरता से लिया है कि संकट की स्थिति में स्थानीय प्रशासन सक्रिय होने के बजाय मूकदर्शक बना रहा और देर शाम तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।

5 निर्देश जारी किए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात कराएगा। दूसरा, चुनाव आयोग अधिकारियों के आवास पर भी सुरक्षा बल तैनात करे, जिन्हें अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर कोई डर या खतरा महसूस हो रहा है। तीसरा, आयोग और राज्य सरकार न्यायिक अधिकारियों को काम को ठीक से पूरा करने देने के लिए उपाय करे।

इनके अलावा, गृह सचिव, डीजीपी DGP, जिला मजिस्ट्रेट और सभी पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि आपत्ति दर्ज करने के लिए परिसर में दो या तीन से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश न दिया जाए। साथ ही, सुनवाई के दौरान एक जगह पर 5 से अधिक लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति न दी जाए। साथ ही मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य निर्वाचन अधिकारी अनुपालन रिपोर्ट देंगे।

बड़ी खबरें

View All

नई दिल्ली

दिल्ली न्यूज़

ट्रेंडिंग