
UGC controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम के खिलाफ आज ( बृहस्पतिवार) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने असहमति जताते हुए इस नियम पर रोक लगा दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने UGC और केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि इस नए नियम का दुरुपयोग हो सकता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा जरूरी है और यूजीसी के नए नियमों के गलत इस्तेमाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई दिल्ली के सर्वोच्च न्यायालय में 19 मार्च को की जाएगी।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने टिप्पणी की कि पहली नजर में ही इन रेगुलेशनों की भाषा स्पष्ट नहीं लगती और इसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों को इसकी भाषा की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इसका गलत इस्तेमाल न हो सके। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 से एक याचिका लंबित है, जिसमें 2012 के नियमों को चुनौती दी गई थी, जिन्हें अब 2026 के नए रेगुलेशनों से बदल दिया गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 2012 के नियमों की समीक्षा करते समय अदालत उससे आगे जाकर व्यापक दायरे में विचार नहीं कर सकती।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे इस मुद्दे पर विचार के लिए प्रतिष्ठित लोगों की एक समिति बनाने पर सोचें, ताकि समाज में बिना भेदभाव के समान विकास संभव हो सके। वहीं न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15(4) राज्यों को अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि जब कानून प्रगतिशील होना चाहिए, तो उसमें पीछे ले जाने वाला रुख क्यों अपनाया जाए।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है भारत उस दौर की ओर नहीं जाएगा, जहां अमेरिका में कभी नस्ल के आधार पर अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सहमति जताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों का गलत फायदा उठाया जा सकता है। वहीं वकील ने अदालत का ध्यान कुछ राजनीतिक नेताओं के बयानों की ओर दिलाया, जिनमें कहा गया था कि सामान्य वर्ग के छात्रों से शुल्क वसूला जाएगा।
Updated on:
29 Jan 2026 02:11 pm
Published on:
29 Jan 2026 02:07 pm

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