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मोबाइल टैरिफ वृद्धि पर सरकार की जवाबदेही तय हो: बेनीवाल

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोबाइल टैरिफ और डेटा दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में निजी टेलीकॉम कंपनियों द्वारा बार-बार टैरिफ बढ़ाए जाने से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, […]

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Hanuman Beniwal big statement central new UGC guidelines issue not backed down central government

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल। फाइल फोटो - ANI

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोबाइल टैरिफ और डेटा दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में निजी टेलीकॉम कंपनियों द्वारा बार-बार टैरिफ बढ़ाए जाने से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

दरअसल, सांसद बेनीवाल ने सरकार से सवाल किया कि क्या आम जनता के लिए दूरसंचार सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाए रखने के लिए कोई ठोस नियामक हस्तक्षेप किया जाएगा। उन्होंने यह भी पूछा कि निजी कंपनियों द्वारा की जा रही टैरिफ वृद्धि की निगरानी के लिए क्या कोई प्रभावी तंत्र मौजूद है। सरकार की ओर से संचार राज्य मंत्री डॉ. पेमासानी चंद्र शेखर ने लिखित जवाब में बताया कि टैरिफ निर्धारण का अधिकार भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राइ) के पास है। वर्तमान में अधिकांश सेवाएं ‘फॉरबियरेंस’ नीति के अंतर्गत हैं, जिसके तहत कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अपनी दरें तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। इस पर बेनीवाल ने कहा कि सरकार को केवल नीतिगत ढांचे का हवाला देने के बजाय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि टेलीकॉम क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और आम नागरिकों को सस्ती सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सांसद ने यह भी कहा कि ग्रामीण और गरीब वर्ग के लिए मोबाइल और इंटरनेट अब आवश्यक सेवाएं बन चुकी हैं, इसलिए इनके दामों में अनियंत्रित वृद्धि को रोकना सरकार की जिम्मेदारी है।

जनविश्वास शब्दों से नहीं, पारदर्शिता से बनता है

लोकसभा में हनुमान बेनीवाल ने जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा करते हुए कहा कि जन विश्वास केवल शब्दों से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी से बनता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह विधेयक वास्तव में जनता के भरोसे को मजबूत करेगा या सिर्फ औपचारिक सुधार बनकर रह जाएगा। बेनीवाल ने कहा कि बिल में डिजिटल ट्रैकिंग, समयबद्ध सेवाएं और अधिकारियों की जवाबदेही जैसे ठोस प्रावधानों की कमी नजर आती है, जिससे जनता का भरोसा बढ़ाने का उद्देश्य अधूरा रह सकता है।

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