
AAP Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच रिश्तों को लेकर सियासी गलियारों में पहले से ही चर्चा हो रही थी, लेकिन गुरुवार को पार्टी ने उन्हें डिप्टी लीडर पद से हटाकर साफ कर दिया कि यह महज शिगूफा नहीं, बल्कि वास्तविक कलह थी। अब पार्टी ने पत्र लिखकर राज्यसभा सचिवालय से मांग की है कि सदन में आप कोटे से राघव चड्ढा को बोलने के लिए समय न दिया जाए। जानकारों का कहना है कि पार्टी ने यह फैसला एक पल में नहीं लिया, बल्कि लंबे समय से राघव केजरीवाल से अलग लाइन ले रहे थे। विस्तार से जानिए कैसे पार्टी और राघव के बीच दूरियां बढ़ती गईं।
पिछले कुछ महीनों से ऐसे कई संकेत मिल रहे थे, जिनसे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण फरवरी के अंत में तब देखने को मिला, जब ट्रायल कोर्ट ने कथित शराब घोटाले के मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं को दोषमुक्त कर दिया। उस दौरान की गतिविधियों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी।
राघव और पार्टी के नेताओं के बीच के संबंध का आकलन उस घटना से भी जोड़ा जा रहा है, जब शराब नीति मामले में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं को निचली अदालत ने बरी कर दिया, जिसके बाद पार्टी में जश्न का माहौल था। पार्टी नेता लगातार एक्स (X) पर भाजपा पर हमलावर थे। मीडिया से मुखातिब होते हुए केजरीवाल की आंखों में आंसू आ गए थे। संजय सिंह, सिसोदिया और केजरीवाल के साथ अन्य नेता भाजपा पर साजिश के आरोप लगा रहे थे, लेकिन उस मौके पर भी राघव चड्ढा खामोश रहे। मीडिया में बाइट देने की बात तो दूर, उन्होंने एक्स पर औपचारिकता निभाने के लिए भी कोई ट्वीट नहीं किया। उनकी इस चुप्पी ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया।
सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई कि आम आदमी पार्टी (AAP) और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरियों की एक बड़ी वजह उनकी कार्यशैली रही। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर असहजता थी कि राज्यसभा में वे पार्टी की नीतियों और एजेंडे को प्राथमिकता देने के बजाय उन मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रहे थे, जिनसे उनकी व्यक्तिगत छवि मजबूत हो। पार्टी को लगने लगा था कि वे संगठन की आवाज बनने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाने में ज्यादा व्यस्त हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि अरविंद केजरीवाल के कभी सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे राघव चड्ढा ने धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर साझा किए जाने वाले पोस्ट और वीडियो से पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिह्न तक गायब होने लगे। इन संकेतों ने स्पष्ट कर दिया कि चड्ढा और ‘आप’ के बीच दूरी काफी बढ़ चुकी है।
इंडिया टुडे के साथ बातचीत के दौरान जब संजय सिंह से पूछा गया कि क्या राघव चड्ढा अब आम आदमी पार्टी का हिस्सा नहीं हैं, तो उन्होंने तुरंत इस बात से इनकार किया। हालांकि, जब शराब नीति मामले में मिली राहत के दौरान राघव की गैरमौजूदगी और चुप्पी पर सवाल उठाया गया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस बारे में वही बेहतर बता सकते हैं।
आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। जब इस फैसले के पीछे की वजह को लेकर सांसद संजय सिंह से सवाल किया गया, तो वह पत्रकारों से बचते नजर आए। उन्होंने केवल इतना कहा कि राज्यसभा सचिवालय को पार्टी के इस निर्णय की जानकारी दे दी गई है।
Updated on:
02 Apr 2026 05:07 pm
Published on:
02 Apr 2026 05:07 pm
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