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अब नहीं बनेंगे अनिरुद्धाचार्य के ‘मीम्स’: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाई रोक

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य के पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा करते हुए उनके नाम, आवाज़, छवि और व्यक्तित्व के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। अदालत ने AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और अपमानजनक मीम्स को हटाने का आदेश देते हुए ‘जॉन डो’ के तहत अज्ञात आरोपियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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Delhi High Court bans making of memes on Aniruddhacharya

अनिरुद्धाचार्य की फोटो

Delhi High Court: सोशल मीडिया पर आपने प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य के मीम्स या वायरल वीडियो देखाे होंगे, लेकिन अब इन सब पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल, अदालत ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके नाम, आवाज, छवि और व्यक्तित्व के किसी भी प्रकार के अनधिकृत इस्तेमाल, विशेष रूप से AI-जनरेटेड कंटेंट और अपमानजनक मीम्स पर तत्काल रोक लगा दी है। जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह 'जॉन डो' (अज्ञात आरोपियों के खिलाफ) आदेश पारित किया है।

आपको बता दें कि आध्यात्मिक वक्ता अनिरुद्धाचार्य ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि YouTube और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विभिन्न अज्ञात संस्थाओं और व्यक्तियों द्वारा उनकी पहचान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उनकी दलील थी कि उनके बोलने के विशिष्ट अंदाज, लोकप्रिय जुमलों और उनकी शिक्षाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे उनकी वैश्विक साख को नुकसान पहुंच रहा है।

AI और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक का इस्तेमाल कर अनिरुद्धाचार्य के फर्जी वीडियो तैयार कर रहे हैं, जिनमें उन्हें भ्रामक और गलत संदर्भों में पेश किया जा रहा है। डिजिटल हेरफेर के जरिए उनकी आवाज़ और चेहरे की नकल कर मनगढ़ंत दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जबकि उनके प्रवचनों का मज़ाक उड़ाने के लिए अपमानजनक मीम्स बनाकर उन्हें व्यावसायिक और अनुचित तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस गेडेला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आध्यात्मिक गुरु की छवि सर्वमान्य और लोकप्रिय है। कोर्ट ने माना कि यदि इस प्रकार के डिजिटल कंटेंट पर रोक नहीं लगाई गई, तो उनकी प्रतिष्ठा को ऐसा नुकसान होगा जिसकी भरपाई पैसों से नहीं की जा सकेगी। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि उल्लंघन करने वाली यह सामग्री केवल एक मनोरंजन या पैरोडी (नकल) मात्र नहीं है; बल्कि यह अपमानजनक है और सीधे तौर पर अनिरुद्धाचार्य के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करती है।

अदालत का आदेश और पाबंदी

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश देते हुए अनिरुद्धाचार्य के नाम, आवाज, फोटो या व्यक्तित्व का किसी भी तरह से व्यावसायिक इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि AI और डीपफेक तकनीक के जरिए बनाए गए सभी भ्रामक वीडियो तुरंत हटाए जाएं। साथ ही उनके बोलने के अंदाज या जुमलों की नकल कर मजाक उड़ाने वाले किसी भी डिजिटल हेरफेर पर भी पाबंदी लगाई गई है। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश उन अज्ञात व्यक्तियों पर भी लागू होगा, जो इस तरह का कंटेंट बनाकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित कर रहे हैं। इस फैसले को डिजिटल युग में ‘पर्सनालिटी राइट्स’ की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।