पुरातन से नूतन : ऋषिकेश के ऐतिहासिक ‘बीटल्स’ आश्रम के कायापलट की तैयारी
देहरादून. ऋषिकेश में राजाजी नेशनल पार्क के अंदर ऐतिहासिक चौरासी कुटिया स्वर्गाश्रम के कायापलट की योजना बनाई गई है। इसे ‘बीटल्स’ आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। ब्रिटिश बैंड बीटल्स के सदस्य जॉर्ज हैरिसन, रिंगो रिंगस्टार, पॉल मकटर्नी और जॉन लेनन ने 1968 में इस आश्रम का दौरा किया था। उस समय यह महर्षि महेश योगी का निवास था।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड सरकार ने ‘बीटल्स’ आश्रम में कैफेटेरिया, सात्विक रसोई, चाय मंडप, अनप्लग्ड (बगैर बिजली बजने वाले) संगीत के लिए एक स्थान, बीटल्स पर प्रदर्शनी और स्मारिका विक्रय केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई है। कंसल्टेंसी फर्म एचसीपी डिजाइन, प्लानिंग और मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने उत्तराखंड सरकार को अंतिम मास्टर प्लान रिपोर्ट के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सौंपी है। यह फर्म सेंट्रल विस्टा और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना की डिजाइन में शामिल थी। डीपीआर की समीक्षा के बाद सरकार परियोजना के लिए निविदा जारी करेगी। परियोजना की लागत पर्यटन विभाग वहन करेगा, जबकि क्रियान्वयन वन विभाग करेगा, क्योंकि आश्रम बाघ अभयारण्य के तहत आता है।
25 में 12 इमारतों का बदलेगा हुलिया
गंगा के किनारे 60 के दशक में बनी चौरासी कुटिया का नाम इसके 84 ध्यान कक्षों पर आधारित है। इसमें योग केंद्र के दोनों ओर 42-42 कमरे हैं। परिसर में करीब 25 इमारतें हैं। इनमें से 12 को परियोजना के तहत नए सिरे से तैयार किया जाएगा। परियोजना का बजट 84 करोड़ रुपए रखा गया है। डीपीआर में कई संरचनाओं की मरम्मत, पुनर्निर्माण और कुछ इमारतों को ध्वस्त करने का उल्लेख किया गया है।
कभी छपता था परालौकिक ध्यान साहित्य
चौरासी कुटिया शुरुआत में प्रिंटिंग प्रेस के लिए मशहूर थी। यहां परालौकिक ध्यान से संबंधित साहित्य छापा जाता था। प्रिंटिंग प्रेस वाले हिस्से को स्मारिका केंद्र में बदलने की योजना है। वेद भवन को अनप्लग्ड संगीत के केंद्र में परिवर्तित किया जाएगा। इस भवन का इस्तेमाल ध्यान कक्ष के रूप में किया जाता था। बीटल्स के भित्तिचित्रों के कारण यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।