कारोबारी झटका : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले पड़ोसी को ड्रोन भेजने के खिलाफ फैसला
पुणे. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले भारत पर हमले के लिए अपने ड्रोन पाकिस्तान भेजने वाले तुर्किए के खिलाफ पुणे के सेब कारोबारियों ने कड़ा फैसला किया है। वे तुर्किए से सेब नहीं खरीदेंगे। इसकी जगह सेब की खरीदारी हिमाचल प्रदेश और अन्य जगहों से की जाएगी। तुर्किए से आने वाले सेब पुणे में तीन महीने तक बिकते हैं। इस दौरान इनका करीब 1200-1500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है।
पुणे के एपीएमसी मार्केट में सेब कारोबारी सुयोग जेंदे ने कहा, हमने तुर्किए से सेब न खरीदने का फैसला किया है, क्योंकि वह पाकिस्तान का समर्थन करता है। भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रहा था, लेकिन तुर्किए ने अपने ड्रोन पाकिस्तान भेजे। खुदरा कारोबारी भी तुर्किए का सेब खरीदने से इनकार कर रहे हैं। जेंदे ने कहा कि तुर्किए में जब भूकंप आया था तो भारत उसकी मदद करने वाला पहला देश था। लेकिन आतंकवाद पर यह देश पाकिस्तान का समर्थन करता है।
पोत से कराची भेजे गए थे सोंगर ड्रोन
ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से कुछ दिन पहले तुर्किए का एक पोत कराची पहुंचा था। समझा जाता है कि पोत में तुर्किए के सोंगर ड्रोन थे। पाकिस्तान ने आठ और नौ मई को श्रीनगर से लेकर गुजरात तक भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ रिहायशी इलाकों को निशाना बनाते हुए इन ड्रोन से हमले किए थे। भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों ने सभी ड्रोन और मिसाइलों को हवा में मार गिराया था।
हिमाचल में भी आयात रोकने की मांग
भारत हर साल तुर्किए से करीब 1.30 मिट्रिक टन सेब का आयात करता है। इसके अलावा अवैध रूप से अफगानिस्तान के रास्ते भी उसके सेब भारत पहुंचते है। हिमाचल फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने तुर्किए से सेब आयात पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि तुर्किए से सेब आयात होने पर हिमाचल प्रदेश के बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।