
नई दिल्ली। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट (बीआरई समिट)-2026 में राजस्थान ने अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता, निवेश की संभावनाओं और आधुनिक तकनीकी पहलों के जरिए मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। समिट में एक प्रमुख पार्टनर स्टेट के रूप में शामिल राजस्थान की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 51 गीगावाट के पार पहुंच गई है। पिछले 34 महीनों में इसमें करीब 28 गीगावाट की बढ़ोतरी हुई है। राज्य ने अब केवल सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण, आधुनिक ग्रिड प्रबंधन और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी तैयारी प्रदर्शित की।
राजस्थान की ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने बताया कि राजस्थान के प्लैनरी सेशन में राजस्थान में अक्षय उर्जा की जबरदस्त संभावनाओं के बारे में चर्चा के दौरान प्रदेश की एआई, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उद्योगों से बढ़ने वाली बिजली मांग को पूरा करने की रणनीति के बारे में विस्तार से बताया गया। वहीं एनर्जी स्टोरेज, ग्रिड इंटिग्रेशन, ट्रांसमिशन नेटवर्क और रिलायबल और एफिशिएंट पॉवर पर प्रदेश की तैयारियों के बारे में निवेशकों को जानकारी दी गई। इसके साथ ही जयपुर डिस्कॉम में डिजिटल ट्विन तकनीक के इस्तेमाल से बिजली नेटवर्क की डिजिटल मैपिंग, लोड विश्लेषण और भविष्य की जरूरतों के अनुसार नेटवर्क रेगुलेशन करने के बारे में बताया गया।
रेगिस्तानी छटा के साथ लगे सोलर पैनलों के परिदृश्य से 180 वर्गमीटर में तैयार राजस्थान के पवेलियन ने सम्मिट में सबका अलग से ध्यान आकर्षित किया। पवैलियन में सोलर पार्क, पम्प्ड स्टोरेज, बैटरी ऊर्जा भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार को प्रदर्शित किया गया।
समिट में बीकानेर के पूगल सोलर पार्क की प्रतिस्पर्धी बोलियां विशेष चर्चा में रहीं। परियोजना में 2450 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ 1600 मेगावाट क्षमता और 6400 मेगावाट घंटे की बैटरी भंडारण व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके लिए 3.42 से 3.54 रुपए प्रति यूनिट की कम्पीटिटिव दरें सामने आई हैं। इससे राजस्थान की रणनीति में बदलाव भी स्पष्ट हुआ है। अब जोर केवल सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराने के लिए भंडारण क्षमता विकसित करने पर है।
समिट के दौरान जयपुर डिस्कॉम के लम्बे समय बाद लाभ में आने की उपलब्धि भी चर्चा का विषय रही। बिजली वितरण क्षेत्र में राजस्व वसूली, तकनीकी एवं वाणिज्यिक घाटे में कमी और डिजिटल निगरानी के जरिए वित्तीय स्थिति सुधारने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया गया।
सम्मिट के दौरान जहां राजस्थान के प्लेनरी सेशन हुए वहीं डिजिटल ट्विन और प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स पर फायरसाइड चैट के सेशन भी हुए। अलग अलग सेशन्स को ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ऊर्जा सचिव आरती डोगरा, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के सीएमडी डॉ. रोहित गुप्ता सहित देश-विदेश के निवेशक और विशेषज्ञों ने संबोधित किया।