
Sonam Wangchuk wife: राजधानी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां इलाज के लिए भर्ती कराए गए लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की पत्नी ने मेडिकल स्टाफ को सीधी और सख्त चेतावनी दे डाली। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि परिवार और खुद वांगचुक की लिखित सहमति के बिना उन्हें किसी भी तरह की दवा या ड्रिप न दी जाए। इस हाई-प्रोफाइल अल्टीमेटम के बाद अस्पताल प्रशासन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
हालांकि उनके अस्पताल पहुंचने से आंदोलन थमा नहीं, बल्कि इसे नया नेतृत्व मिल गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंच से घोषणा की कि अब वे स्वयं आमरण अनशन पर बैठेंगे और आंदोलन पहले से अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।
अभिजीत दिपके ने कहा कि वह शनिवार से अपना आमरण अनशन शुरू कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि किसी भी परिस्थिति में आंदोलन से पीछे न हटें। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं बल्कि उन मुद्दों की लड़ाई है, जिनसे हजारों लोगों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक को हटाने की कार्रवाई से लोगों का आक्रोश और बढ़ेगा तथा आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलेगा।
दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पुलिस ने सोनम वांगचुक को चादरों की आड़ में प्रदर्शन स्थल से बाहर ले जाकर अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि इसे जिस तरीके से अंजाम दिया गया, उसने आंदोलनकारियों के बीच असंतोष पैदा किया है।
हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में आधिकारिक तौर पर यही कहा गया कि वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय निगरानी के लिए अस्पताल ले जाना आवश्यक था। लंबे समय तक भूख हड़ताल करने वाले किसी भी व्यक्ति के शरीर में गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, इसलिए समय रहते इलाज जरूरी माना जाता है।
सोनम वांगचुक की पत्नी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस बात की जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खुद अस्पताल में मुस्तैद हैं और वांगचुक के स्वास्थ्य पर पल-पल की नजर रख रही हैं। उन्होंने साफ तौर पर अस्पताल प्रबंधन को अल्टीमेटम दिया है कि कोई भी डॉक्टर या स्टाफ उनकी मर्जी के बिना वांगचुक को मुंह के जरिए (Oral) या नस के जरिए (IV Fluid) किसी भी प्रकार की दवा देने की कोशिश न करे।
उनकी पत्नी का बयान:
हमारी इजाजत और डॉक्टरों की सही सलाह के बिना वांगचुक को कोई भी दवा या इंजेक्शन नहीं दिया जाना चाहिए। मैं खुद हर हलचल पर पैनी नजर रख रही हूं।
आपको बता दें कि सोनम वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे।
लद्दाख से दिल्ली तक 'सत्याग्रह मार्च' निकालने के बाद जब वे दिल्ली की सीमा पर पहुंचे, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। लगातार उपवास के बीच अनशन पर डटे रहने के कारण उनके शरीर में कमजोरी आ गई, जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें आनन-फानन में सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया।
यह पूरा विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से लद्दाख के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान, जमीन और पर्यावरण के संरक्षण के लिए विशेष दर्जे की मांग कर रहे हैं।
छठी अनुसूची की मांग: वांगचुक का तर्क है कि लद्दाख की 90% से अधिक आबादी जनजातीय है, इसलिए इसे असम, मेघालय की तरह स्वायत्तता मिलनी चाहिए।
लेह-कारगिल में एकजुटता: वांगचुक के इस आंदोलन को 'एपेक्स बॉडी लेह' और 'कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस' (KDA) का पूरा समर्थन हासिल है।
अस्पताल के भीतर से आई इस ताजा चेतावनी के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल प्रशासन और सरकार इस संवेदनशील मामले से कैसे निपटती है, क्योंकि वांगचुक के स्वास्थ्य से लद्दाख के हजारों समर्थकों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।