
Jantar Mantar Protest Case: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले सहित अन्य आरोपों का सामना कर रहे स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। स्वतंत्र भारद्वाज की नियमित जमानत याचिका पर अदालत ने अपना फैसला 15 सितंबर के लिए सुरक्षित रखा था।
इस मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से उनके वकील ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी के पीछे कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों की भूमिका रही है। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति की शिकायत के आधार पर कार्रवाई हुई, उसी शिकायतकर्ता ने जून में CJP के प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज पर हमला किया था।
स्वतंत्र भारद्वाज के वकील के मुताबिक, उनके मुवक्किल के खिलाफ 23 जून को FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने 27 जून को पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस भेजा था। वकील ने बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज 29 जून को जांच में शामिल हुए और पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया।बचाव पक्ष का दावा है कि इसके बाद कुछ राजनीतिक घटनाक्रम हुए और 4 सितंबर को स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया गया। वकील ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के बाद पॉक्सो एक्ट के तहत एक अलग FIR दर्ज की गई।
सोमवार की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने दिल्ली पुलिस से यह सवाल किया कि क्या कथित घटना के समय स्वतंत्र भारद्वाज ने जातिसूचक गाली दी थी। इस पर पुलिस की ओर से बताया गया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक गाली दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं था। पुलिस के अनुसार, बाद में दोबारा बयान दर्ज किए जाने के दौरान शिकायत में जातिसूचक गाली का आरोप जोड़ा गया। इसी आरोप के आधार पर मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाए जाने की बात सामने आई।
स्वतंत्र भारद्वाज को 7 सितंबर को अदालत के आदेश पर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देकर राहत दी है। वहीं, उनकी नियमित जमानत याचिका पर अदालत का फैसला 15 सितंबर को आने की उम्मीद है।