
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार अब प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ अपने वैचारिक एजेंडे को भी गति देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार सांस्कृतिक विरासत, कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, निवेश और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे मुद्दों को एक साझा राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है। सरकार का दावा है कि इन कदमों के जरिए बंगाल को विकास के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए दौर में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
दरअसल, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद अब वैचारिक बदलाव का समय है। इसी रणनीति के तहत अगस्त महीने को विशेष महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री अधिकारी के अनुसार अगस्त का लगभग हर दिन किसी न किसी ऐतिहासिक घटना से जुड़ा रहा है। इसे देखते हुए सरकार पूरे महीने जनजागरण कार्यक्रम चलाएगी और विभिन्न मुद्दों पर लोगों के बीच संवाद करेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार अगस्त में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित कराने की तैयारी में है। भाजपा यूसीसी को सामाजिक समानता, महिला अधिकारों और राष्ट्रीय एकता से जोड़कर पेश कर रही है। इसके साथ ही धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की भी तैयारी चल रही है। अगस्त में यूसीसी के समर्थन में राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें सभाओं, संवाद कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए लोगों को इसके प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि अवैध घुसपैठ के मामलों में सरकार ने अपनी रणनीति बदली है। नीति के तहत ऐसे लोगों को लंबे समय तक जेल में रखने के बजाय होल्डिंग केंद्रों में रखकर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीमा पार वापस भेजने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि जेलों में लंबे समय तक रखने से सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 'पत्रिका' से बातचीत में दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब 10 हजार बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेज चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में बनाए गए 12 होल्डिंग केंद्रों में करीब दो हजार लोगों को रखा गया है। अधिकारी ने कहा कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करना आर्थिक विकास की पहली शर्त है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में टोलाबाजी (जबरन वसूली) पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है, जिससे उद्योगों का विश्वास लौट रहा है। उनका कहना है कि सुरक्षित कारोबारी माहौल बनने से पश्चिम बंगाल एक बार फिर निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल केवल भारत ही नहीं, बल्कि पड़ोसी बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के लिए भी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। राज्य के पास जल, वन, खनिज और समुद्री संसाधनों की भरपूर क्षमता है। इनका प्रभावी उपयोग कर बंगाल को फिर से आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है।