
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सालाना बैठकों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) हर साल के बजाय तीन साल में एक बार आयोजित की जाएगी। इसके स्थान पर संघ के नौ क्षेत्रों में हर साल क्षेत्रीय प्रतिनिधि सभाएं होंगी। संगठनात्मक ढांचे में इस बदलाव का उद्देश्य फैसले लेने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करना और क्षेत्रीय स्तर पर कामकाज को अधिक गति देना है।
संघ की स्थापना के बाद से अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हर साल मार्च में आयोजित होती रही है। यह संघ का प्रमुख संगठनात्मक मंच है, जहां देशभर से प्रतिनिधि जुटते हैं, संगठन के कामकाज की समीक्षा होती है और भविष्य की दिशा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती है। नई व्यवस्था में नागपुर में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक तीन साल में एक बार होगी। यह बैठक प्रमुख नीतिगत विषयों और सरकार्यवाह के चुनाव जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक अवसरों पर केंद्रित रहेगी।
राज्य प्रचारक व्यवस्था लागू होने और प्रांत स्तर के संगठनात्मक ढांचे में संभाग स्तर पर पुनर्गठन के चलते अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के स्वरूप में भी परिवर्तन होगा। वर्तमान व्यवस्था में संघ की चार प्रमुख बैठकें होती हैं। इनमें अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल, अखिल भारतीय समन्वय बैठक और अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक शामिल हैं। प्रांत व्यवस्था समाप्त होने के बाद संभाग व्यवस्था के अनुरूप प्रांत प्रचारक बैठक के स्थान पर संभाग प्रचारक बैठक के रूप में नई व्यवस्था शुरू हो सकती है। वहीं राज्य प्रचारकों के लिए भी एक बैठक पर विचार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2 से 4 नवंबर तक मध्य प्रदेश के इंदौर में होगी। बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह सरकार्यवाह और अखिल भारतीय कार्य विभागों के प्रमुखों सहित संघ के शीर्ष पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ देश और दुनिया से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक में संघ के नए प्रस्तावित संभाग स्तरीय ढांचे से जुड़े बिन्दुओं और स्वरूप पर भी चर्चा होगी। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि , बैठक में संघ की सभी 46 प्रांतीय इकाइयों और 11 क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इनमें प्रांत और क्षेत्र संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक तथा उनके सह पदाधिकारी शामिल हैं।
बैठक में पिछले एक वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। विजयादशमी पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के उद्बोधन में उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी।