नई दिल्ली

32 साल बाद यमुना समझौता धरातल पर, राजस्थान-हरियाणा में सहमति

यमुना जल को पाइपलाइन के जरिए चूरू तक लाने की डीपीआर पर बुधवार को हरियाणा, राजस्थान में पूर्ण सहमति बन गई। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। अब राजस्थान का जल संसाधन विभाग इसे केन्द्रीय जल आयोग के पोर्टल पर अपलोड करेगा और इसी के साथ इस परियोजना के लिए वित्त एवं अन्य संसाधन जुटाने की कवायद शुरू हो जाएगी। फरवरी में डीपीआर पर सैद्धान्तिक सहमति बनने के बाद से ही डीपीआर पर हरियाणा की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आ रहा था।

2 min read

नई दिल्ली। यमुना जल को पाइपलाइन के जरिए चूरू तक लाने की डीपीआर पर बुधवार को हरियाणा, राजस्थान में पूर्ण सहमति बन गई। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। अब राजस्थान का जल संसाधन विभाग इसे केन्द्रीय जल आयोग के पोर्टल पर अपलोड करेगा और इसी के साथ इस परियोजना के लिए वित्त एवं अन्य संसाधन जुटाने की कवायद शुरू हो जाएगी।

दूर हुआ तीन महीने का गतिरोध

फरवरी में डीपीआर पर सैद्धान्तिक सहमति बनने के बाद से ही डीपीआर पर हरियाणा की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आ रहा था। डीपीआर में जलापूर्ति के लिए पानी की मांग के संदर्भ में भी कोई जानकारी हरियाणा से नहीं मिल रही थी। ऐसे में डीपीआर की स्थिति अटकी हुई थी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली के पिछले दौरों के दौरान केन्द्रीय मंत्री सीआर पाटील को इस बारे में अवगत करवाया था। इस पर बुधवार को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और आला अधिकारियों की मीटिंग पाटिल के आवास पर हुई जहां पाटिल ने सभी लम्बित बिन्दुओं का निराकरण बैठक में ही करने के लिए कहा। राजस्थान पहले से ही छह जगहों से पेयजलापूर्ति (टैपिंग पॉइन्ट्स) के प्रावधान को डीपीआर में शामिल कर चुका था। हरियाणा के अधिकारियों के पानी की मात्रा का सवाल उठाने पर मुख्यमंत्री शर्मा ने पानी आने पर सबको मिलने की बात कही तो हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी ने भी इससे सहमति जताई। हरियाणा की ओर से करीब 8 जगहों से पानी की आपूर्ति के लिए कहा गया जिसे स्वीकारते हुए डीपीआर को अपलोड करने के निर्देश बैठक में ही दे दिए गए।

किशाऊ परियोजना पर भी हुई बात

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि बैठक के दौरान किशाऊ परियोजना पर सभी संबंधित राज्यों में सहमति बनाने के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में ये अधिकारी थे मौजूद

केन्द्रीय जल शक्ति सचिव वी एल कांथा राव, राजस्थान के एसीएस जल संसाधन अभय कुमार, चीफ इंजीनियर जल संसाधन भुवन भास्कर, हरियाणा के सीएस अनुराग रस्तोगी, एसीएस अनुराग अग्रवाल, चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह।

आरआरटीएस, भिवाड़ी जल भराव पर भी चर्चा

बैठक के दौरान राजस्थान को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के जरिए हरियाणा के रास्ते दिल्ली से अलवर को जोड़ने की परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी। बैठक में भिवाड़ी में जल भराव की समस्या पर भी चर्चा हुई।

यमुना जल परियोजनाः फैक्ट फाइल

17 फरवरी 2024 को हुआ था राजस्थान और हरियाणा के बीच एमओयू

हथिनी कुंड बैराज से चूरू के हासियावास तक 265 किलोमीटर तीन पैरेलल पाइप लाइन डलेगी। चूरू, सीकर, झुंझुनूं को 577 एमसीएम पानी मिलेगा ऊपरी यमुना बेसिन के रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ से इसी पाइपलाइन से आएगा पानी

बत्तीस साल पहले हुआ था एमओयू

राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं नई दिल्ली के बीच 12 मई 1994 को हुए यमुना जल समझौते के तहत हथिनी कुंड से मानसून अवधि में 1917 क्यूसेक जल राजस्थान को आवंटित किया था। कुल पानी का 40.6% हरियाणा, 35.1% यूपी, 10.4% राजस्थान, 6.3% दिल्ली और 1.7% हिमाचल प्रदेश के बीच बंटवारा होना था। तीन दशक से लागू नहीं हो सका यह समझौता अब साकार होने की ओर बढ़ रहा है।

Published on:
14 May 2026 10:23 am
Also Read
View All