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गंदे कंटेंट पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, गूगल और एपल को दिया अल्टीमेटम

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल और एप्पल को अपने स्टोर से अश्लीलता, ड्रग्स और अवैध कामों वाले ऐप्स को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। इन ऐप्स के कारण पूरी पीढ़ी को बर्बाद हो रही है।

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Google Apple App Store Pornography Case

PHOTO ANI

Delhi High Court Illegal Apps Ban: टेक जगत की दिग्गज कंपनियों, गूगल और एप्पल पर अब कानूनी शिकंजा कस गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सख्त रुख अपनाते हुए दोनों कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से उन सभी मोबाइल ऐप्स को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है, जो गंदे कंटेंट, देह व्यापार, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मुनाफे की आड़ में देश के युवाओं के भविष्य की बलि नहीं दी जा सकती।

'पूरी पीढ़ी बर्बाद हो रही है'

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान चिंता जाहिर करते हुए कहा, हम अपनी आंखों के सामने पूरी पीढ़ी को तबाह होते नहीं देख सकते। कोर्ट ने एप्पल और गूगल को उनकी नैतिक और कानूनी जवाबदेही याद दिलाते हुए कहा कि ऐसे ऐप्स की पहुंच बहुत व्यापक है, जो समाज और खासकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार कर रहे हैं। अदालत के मुताबिक, कंपनियों को सिर्फ शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी निगरानी प्रणाली को मजबूत करना होगा।

IT नियमों के तहत कंपनियों की जवाबदेही तय

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Google और Apple जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म सिर्फ शिकायत मिलने पर कार्रवाई वाली नीति अपनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि ऐसे अवैध ऐप्स उनके ऐप स्टोर पर अपलोड ही न हो पाएं। IT Rules, 2021 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि गैरकानूनी और आपत्तिजनक सामग्री को फैलने से रोकना इन टेक दिग्गजों की कानूनी बाध्यता है।

क्या है पूरा मामला?

यह ऐतिहासिक आदेश रुबिका थापा की दायर एक जनहित याचिका PIL पर आया है। याचिका में खुलासा किया गया था कि गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर ऐसे दर्जनों ऐप्स हैं, जो मानव तस्करी और ड्रग्स जैसी खतरनाक हरकतों के लिए मंच दे रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील तन्मय मेहता ने कोर्ट को चौंकाने वाली जानकारी दी कि ये ऐप्स अवैध हरकतों के जरिए करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमा रहे हैं और मॉनिटरिंग की कमी का फायदा उठा रहे हैं।

सरकार ने भी किया सख्त कार्रवाई का समर्थन

केंद्र सरकार ने भी इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिकाकर्ता की दलीलों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार अकेले हर चीज को ब्लॉक नहीं कर सकती, इसलिए इन प्लेटफॉर्म्स को खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। सरकार ने माना कि इन ऐप्स पर लगाम लगाना सुरक्षा और नैतिकता के लिहाज से अनिवार्य है।

अगली सुनवाई में मांगी रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने गूगल, एप्पल और केंद्र सरकार को जुलाई तक की मोहलत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल की जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि इन ऐप्स को हटाने और रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।