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Patrika Explainer: अब्बास अराघची भारत में, उधर ओमान में हमले में डूब गया भारतीय जहाज, जयशंकर बोले- शांति टुकड़ों में नहीं बंट सकती

BRICS Summit: ब्रिक्स समिट में भाग लेने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भारत में है। इसी दौरान ईरानी ड्रोन अटैक में यूएई के तट के पास खड़ा एक भारतीय जहाज डूब गया। जानिए इस पर क्या कह रहे भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर...

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Indian Foreign Minister S. Jaishankar and Iranian Foreign Minister Abbas Araqchi (Photo: ANI)

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (फोटो- ANI)

Strait of Hormuz Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर जारी है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉकेड की स्थिति के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। गुरुवार को ओमान के तट के पास एक भारतीय मालवाहक जहाज संदिग्ध ड्रोन हमले में डूब गया। हालांकि, जहाज के क्रू मेंबर्स को समय रहते बचा लिया गया, लेकिन इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

भारतीय विदेश मंत्री बोले- स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती

भारतीय झंडे वाला जहाज ओमान के पास हमले का शिकार हो गया। भारत ने इसे साफ तौर पर अस्वीकार्य बताया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि मछुआरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में एस जयशंकर ने जोर देकर कहा कि स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती और शांति टुकड़ों में नहीं बंट सकती।

बैठक में UAE और ईरान के मंत्री भी थे मौजूद

बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सेय्यद अब्बास अराघची और यूएई के खलीफा शाहीन अल मरार भी मौजूद थे। दोनों देशों के रिश्तों में काफी दरार है। ईरान, यूएई पर अमेरिकी ठिकानों को सहारा देने का आरोप लगाता रहा है। हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के यूएई दौरे की खबर आई तो ईरान और नाराज हो गया। उसने यूएई को अंजाम भुगतने की धमकी दी है। जयशंकर ने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बिठाते हुए कहा कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और किसी भी एकतरफा प्रतिबंध से बचना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि विकासशील देशों पर ऐसे प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

जयशंकर ने दिया BRICS की भूमिका पर जोर

उन्होंने जोर दिया कि BRICS देशों को मिलकर स्थिरता, स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करना चाहिए। दुनिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध से शुरू हुई चुनौतियां अब ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति के रूप में हर विकासशील देश को प्रभावित कर रही हैं। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि समुद्री यातायात पर खतरा, ऊर्जा ढांचे पर दबाव और लगातार तनाव से स्थिति कमजोर हो रही है। उन्होंने गाजा संकट का जिक्र करते हुए मानवीय पहुंच, स्थायी सीजफायर और दो-राष्ट्र समाधान की बात की। लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया जैसे इलाकों में चल रही समस्याओं पर भी चिंता जताई।

BRICS की बैठक में क्या बोले अब्बास अराघची

अराघची ने अमेरिका-इजराइल की कार्रवाइयों की निंदा करते हुए BRICS से आह्वान किया कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन रोकें। उन्होंने कहा, “ईरान दबाव में टूटता नहीं, बल्कि और मजबूत होता है। हम युद्ध नहीं चाहते लेकिन अपनी जमीन और आजादी की रक्षा के लिए तैयार हैं।” उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्रीय अस्थिरता किसी के भी हित में नहीं है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव समेत दूसरे BRICS सदस्यों की मौजूदगी में जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही समस्याओं का स्थायी हल है।