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दिल्ली बम धमाका केस में NIA का बड़ा खुलासा, अल-कायदा से जुड़े थे 10 आतंकी, 7500 पन्नों की चार्जशीट पेश

Delhi Bomb Blast: लाल किले के पास हुए उस खौफनाक धमाके की परतें अब खुल चुकी हैं। एनआईए ने 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर सनसनीखेज खुलासा किया है कि कैसे एक डॉक्टर ने मौत का सामान तैयार कर 11 बेगुनाहों की जान ली।

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दिल्ली बम धमाका केस में NIA का बड़ा खुलासा (ians photo)

Delhi Bomb Blast NIA Chargesheet: पिछले साल 10 नवंबर को जब दिल्ली का लाल किला इलाका एक जोरदार धमाके से दहल उठा था, तो किसी ने नहीं सोचा था कि इसके पीछे सफेद कोट पहनने वाले डॉक्टर्स का हाथ होगा। एनआईए (NIA) ने पटियाला हाउस कोर्ट में जो 7500 पन्नों चार्जशीट पेश की उसमें सामने आया है कि साजिश का मास्टरमाइंड कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर उन नबी था। जांच में सामने आया है कि इन आतंकियों का मकसद भारत की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकना और 'शरिया कानून' लागू करना था। इसके लिए उन्होंने बाकायदा 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' शुरू किया था।

NIA ने किया अल-कायदा नेटवर्क का खुलासा

जांच एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में इस पूरी साजिश की गंभीरता को स्पष्ट किया है। साल 2018 में, गृह मंत्रालय द्वारा AQIS और उसके सभी रूपों को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था। एजेंसी ने आगे बताया कि नवगठित संगठन की छत्रछाया में, उन्होंने 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' शुरू किया, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक रूप से स्थापित भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकना और शरिया शासन लागू करना था।'

इन 10 आरोपियों के नाम आए सामने

एनआईए ने इस मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर उन नबी (मृतक) के अलावा ये नाम शामिल हैं।

  • आमिर राशिद मीर
  • जासिर बिलाल वानी
  • डॉ. मुजमिल शकील
  • डॉ. अदील अहमद राथर
  • डॉ. शाहीन सईद
  • मुफ्ती इरफान अहमद वागे
  • सोयाब
  • डॉ. बिलाल नसीर मल्ला
  • यासिर अहमद डार

तुर्किये के रास्ते भागने वाले थे आतंकी

दरअसल, ये आतंकी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थे। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि इनकी श्रीनगर में एक सीक्रेट मीटिंग हुई थी। इससे पहले इन लोगों ने तुर्किये के रास्ते अफगानिस्तान भागने की कोशिश की थी, लेकिन जब वो प्लान फेल हो गया तो इन्होंने भारत में ही तबाही मचाने की कसम खाई। इन्होंने 'अंसार गजवात-उल-हिंद' (AGuH) नाम के संगठन को दोबारा जिंदा किया और उसे एजीयूएच इंटरिम (AGuH Interim) का नाम दिया। ये संगठन सीधे तौर पर अल-कायदा (AQIS) से जुड़ा हुआ है।

डॉक्टर बने मौत के सौदागर

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चार्जशीट में नामजद 10 आरोपियों में से कई पढ़े-लिखे मेडिकल प्रोफेशनल्स हैं। इन लोगों ने बाजार में मिलने वाले रसायनों से खतरनाक विस्फोटक ट्राईएसिटोन ट्राईपरऑक्साइड (TATP) तैयार किया। यही नहीं, ये आतंकी रॉकेट और ड्रोन के जरिए आईईडी (IED) हमले की प्लानिंग कर रहे थे। इनका टारगेट सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठान थे। एनआईए ने आरोपियों के पास से AK-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और कई देसी कट्टे भी बरामद किए हैं।

588 गवाह और 7500 पन्नों का सबूत

एनआईए की यह जांच दिल्ली से लेकर हरियाणा, यूपी, महाराष्ट्र और गुजरात तक फैली थी। जांच के दौरान 588 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 395 से ज्यादा दस्तावेज जुटाए गए। धमाके में मारे गए डॉ. उमर उन नबी की पहचान डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जरिए हुई है। एनआईए अब उन भगोड़ों की तलाश कर रही है जो इस बड़ी साजिश का हिस्सा थे।

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