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पंजाब में खालिस्तानी झंडा फहराना पड़ा भारी, NIA कोर्ट ने दो दोषियों को सुनाई 5 साल की सजा

NIA court: पंजाब के मोगा में तिरंगे के अपमान करने और खालिस्तान का झंडा फहराने के मामले में NIA Court ने दो दोषियों को 5 साल 6 महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई।

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पंजाब में खालिस्तान झंडा फहराना पड़ा भारी

पंजाब में खालिस्तान झंडा फहराना पड़ा भारी (IANS Photo)

पंजाब के मोगा में तिरंगे के अपमान और खालिस्तान का झंडा फहराने के मामले में अब अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। करीब 6 साल पुराने इस मामले में दोषियों को सजा सुनाई गई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों का संदेश साफ है कि देशविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। NIA की विशेष अदालत, मोहाली ने इस मामले में दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। मोगा के रहने वाले इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह को 5 साल 6 महीने की जेल और 16 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इन पर आईपीसी, गैरकानूनी गतिविधि कानून और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

स्वतंत्रता दिवस से पहले फहराया था खालिस्तानी झंडा

यह घटना 14 अगस्त 2020 की है, जब स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले मोगा के डिप्टी कमिश्नर ऑफिस पर खालिस्तान का झंडा फहराया गया था। आरोपियों ने सरकारी परिसर में घुसकर इमारत पर चढ़कर यह हरकत की। जांच में सामने आया कि उन्होंने तिरंगे की रस्सी काटकर उसे नीचे गिराया और उसका अपमान किया।

विदेश से साजिश, पैसे का लालच दिया गया

एनआईए जांच एजेंसी के मुताबिक इस पूरी साजिश के पीछे गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannun) का हाथ था, जो ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ संगठन से जुड़ा है। गुरपतवंत सिंह पन्नू भारत में आतंकवादी घोषित है। बताया गया कि आरोपियों को इस काम के बदले पैसे देने का लालच दिया गया था। पन्नू ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ऐसे काम करने के लिए उकसाया था और इनाम की घोषणा भी की थी।

अमेरिका में बैठे आरोपी अब भी फरार

इस केस में पन्नू और उसका सहयोगी हरप्रीत सिंह, जो विदेश में हैं, पहले ही अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जा चुके हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इन दोनों ने ही मोगा के आरोपियों को पैसे देकर इस घटना को अंजाम दिलवाया। इस फैसले को सुरक्षा एजेंसियां एक अहम कदम मान रही हैं। इससे यह साफ संकेत गया है कि देश के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश या प्रतीकों के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें।

सोशल मीडिया के जरिए भड़काने की कोशिश

जांच में यह भी सामने आया कि घटना से पहले सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर लोगों को उकसाया गया था। यहां तक कि दिल्ली के लाल किले और अन्य सरकारी इमारतों पर झंडा फहराने के लिए भी इनाम घोषित किया गया था। यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो देश की एकता और सम्मान को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।