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CJP Protest Impact: बिहार का न्योता ठुकराया, पंजाब से फिलहाल दूरी; यूपी में दिख सकती है सियासी हलचल!

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन भले खत्म कर दिया हो, लेकिन जेन-जी की ताकत नए सियासी समीकरणों की आहट दे रही है। फिलहाल इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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भारत

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kamlesh sharma

Jul 27, 2026

CJP protest impact

CJP protest impact: (File Photo: IANS/Deepak Kumar)

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन भले खत्म कर दिया हो, लेकिन जेन-जी की ताकत नए सियासी समीकरणों की आहट दे रही है। फिलहाल इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। सीजेपी ने आंदोलन समापन के दौरान अपने समर्थक के परिवार के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को चेतावनी भी दी थी।

दूसरी ओर, बिहार में जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव का न्योता पार्टी ने ठुकरा दिया, जबकि पंजाब की राजनीति से भी फिलहाल दूरी बनाए रखी है। ऐसे में निकट भविष्य में यूपी ही वह राज्य माना जा रहा है, जहां इस आंदोलन की राजनीतिक गूंज सबसे पहले सुनाई दे सकती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात कही है।

यूपी को चेतावनी क्यों?

आंदोलन समापन के दौरान पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद निवासी समर्थक मोहम्मद जुनैद के परिवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने परेशान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिवार को नहीं छोड़ा गया तो पार्टी उत्तर प्रदेश में बड़ा आंदोलन करेगी। हालांकि उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है।

दीर्घकालीन असर

यदि कॉकरोच जनता पार्टी भविष्य में उत्तर प्रदेश में सक्रिय होती है तो इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। वहीं, पार्टी सीधे चुनावी राजनीति में नहीं भी उतरती है तो भी इस आंदोलन ने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और सोशल मीडिया आधारित लामबंदी को नई पहचान दी है। ऐसे में सभी दलों को युवाओं को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार करनी पड़ सकती है। चूंकि आंदोलन के दौरान भाजपा मुख्य निशाने पर रही, इसलिए उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसके असर पर नजर रहेगी।

यूपी: संभावित असर

सभी दलों को युवा-केंद्रित रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
विपक्ष को सरकार और प्रशासन के खिलाफ नए मुद्दे मिल सकते हैं।
सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक अभियान और तेज होंगे।
छात्र आंदोलनों के राजनीतिक असर पर नई बहस शुरू हो सकती है।
गैर-पारंपरिक युवा वोटरों को साधने की कोशिश बढ़ेगी।

पंजाब: संभावित असर

किसान और सिख राजनीति के बीच युवाओं का नया विमर्श उभर सकता है।
प्रत्यक्ष राजनीति से अधिक मुद्दा-आधारित सक्रियता बढ़ सकती है।
सोशल मीडिया पर युवा नेटवर्क और मजबूत हो सकते हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी की सीधी सक्रियता सीमित रहने के आसार।
नशा, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे अधिक प्रमुख हो सकते हैं।