
Yusuf Pathan nda Meeting: एनडीए (NDA) की बैठक के संदर्भ में प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रवादी सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसद यूसुफ पठान ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह से एकजुट है और देशहित में जो भी सबसे बेहतर होगा, वही करेगी। युसुफ पठान ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि करते हुए कहा कि NCPI में हम सभी एक साथ हैं। हमें बैठक का निमंत्रण मिल चुका है, जिसके लिए फोन कॉल भी आया था। इसलिए हम इस बैठक में जरूर शामिल होंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निमंत्रण का सम्मान करते हुए आगे कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कोई बुलावा आता है, तो उसमें जरूर शामिल होना चाहिए। यह हमारे लिए बेहद गर्व की बात है। हम NCPI के साथ मजबूती से खड़े हैं और देश के फायदे के लिए जो भी जरूरी होगा, उसका पूरा समर्थन करेंगे।
बता दें कि राजनीतिक गलियारों में बहरामपुर से लोकसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान के हालिया कदमों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लगातार दो बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठकों से नदारद रहने के बाद यूसूफ पठान ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। इस बैठक के बाद से ही बंगाल और देश की राजनीति में कई तरह के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और NDA के घटक दलों के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में सांसदों की एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक बैठक आयोजित की गई थी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का गठन करने वाले 20 सांसदों में से तीन सांसद इस बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक से दूरी बनाने वाले इन तीन मुस्लिम सांसदों में युसूफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान शामिल थे। लगातार दो बैठकों में अनुपस्थित रहने से गठबंधन के साथ इन सांसदों के जुड़ाव को लेकर मतभेद के स्पष्ट संकेत मिल रहे थे। बागी सांसद अबू ताहिर खान तो सार्वजनिक रूप से बयान दे चुके हैं कि वे न तो बीजेपी में हैं और न ही एनडीए का हिस्सा हैं।
इस बैठक से पहले पठान ने एक पत्र के जरिए यह मुद्दा उठाया था कि राज्य में जिन 27 से 32 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं और जिनके मामले ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, वे भारी परेशानियों से गुजर रहे हैं। मुलाकात के दौरान पठान ने इन प्रभावित नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की ताकि बुजुर्गों और बच्चों को सुनवाई के लिए लंबी दूरी न तय करनी पड़े।