
Parliament Monsoon Session 2026 :816 सीटें, टैक्स और महिला आरक्षण पर किसका चलेगा दांव? (फोटो सोर्स:@Sansad TV/ANI)
Income Tax Amendment Bill 2026: मानसून सत्र के 14वें दिन संसद का एजेंडा बेहद अहम है, क्योंकि सरकार एक साथ कई बड़े विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। आयकर कानून में बदलाव से जुड़े संशोधन विधेयक, लोकसभा की सीटें बढ़ाने वाले परिसीमन विधेयक और 2029 से महिला आरक्षण लागू करने के प्रयास ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बाधित रही, जिससे इन प्रस्तावों पर चर्चा की दिशा भी चर्चा का विषय बन गई।
मानसून सत्र के 14वें दिन संसद का माहौल एक बार फिर गर्म रहा। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी की, जिसके चलते अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से सदन चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी विषयों पर चर्चा के लिए सदन तैयार है, लेकिन लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दूसरी ओर, राज्यसभा में शोर-शराबे के बीच भी कार्यवाही जारी रही।
लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाली हैं। इस विधेयक के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करना और नए आर्थिक ढांचे के अनुरूप कानूनों को अद्यतन करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था को देखते हुए वित्तीय कानूनों में समय-समय पर संशोधन जरूरी हो गए हैं।
राज्यसभा में वित्त मंत्री विनियोग (एप्रोप्रिएशन) विधेयक भी पेश करेंगी। यह विधेयक वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान बजट से अधिक हुए सरकारी खर्च को संसद की मंजूरी दिलाने के लिए लाया गया है।
लोकसभा से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक के राज्यसभा से पारित होने के बाद सरकार को उस अतिरिक्त व्यय पर संवैधानिक स्वीकृति मिल जाएगी। संसदीय व्यवस्था में यह प्रक्रिया सार्वजनिक वित्तीय जवाबदेही का अहम हिस्सा मानी जाती है।
सरकार ने एक बार फिर परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 की जा सकती है।
परिसीमन का अर्थ केवल सीटें बढ़ाना नहीं होता, बल्कि जनसंख्या और भौगोलिक संतुलन के आधार पर संसदीय क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करना भी होता है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो कई राज्यों में लोकसभा क्षेत्रों का स्वरूप बदल सकता है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का नया गणित सामने आ सकता है।
सरकार 2029 से संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। इसके लिए परिसीमन प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने कांग्रेस समेत विभिन्न दलों और अपने सहयोगी दलों से सहमति बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इससे पहले लगभग चार महीने पहले पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण यह पहल सफल नहीं हो सकी थी।
यदि इस बार व्यापक सहमति बनती है तो देश की संसदीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
पिछले कुछ दिनों से संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि 16 से 18 अगस्त के बीच किसी विशेष सत्र का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे यह संकेत मिला कि सरकार मौजूदा मानसून सत्र के दौरान ही अपने प्रमुख विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
संसद में सरकार की प्राथमिकता आर्थिक सुधार, वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी प्रतिनिधित्व से जुड़े बड़े फैसलों को आगे बढ़ाने की है, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजनीतिक सहमति बनती है या फिर हंगामे के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने की राह और कठिन हो जाती है।
मानसून सत्र का शेष हिस्सा अब केवल विधेयकों की संख्या नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक और संवैधानिक प्रभाव के कारण भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश की कर व्यवस्था, संसद की संरचना और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर होने वाले फैसले आने वाले वर्षों की राजनीति और शासन व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।
Updated on:
06 Aug 2026 12:00 pm
Published on:
06 Aug 2026 12:00 pm
