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राजस्थान का यह ​शिवालय: 251 किलो पारे से निर्मित पारद शिवलिंग

महादेव की भक्ति का पर्व सावन शुरू हो गया। इसी सावन में शाहपुरा जिले के शक्करगढ़ कस्बे का संकट हरण हनुमत धाम मंदिर भी आस्था का केन्द्र बना है। यहां का शिवलिंग सम्भवतया राजस्थान का इकलौता शिवलिंग होगा, जो पारे से बना है। इसका वजन सुन आप चौक जाएंगे।
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Updated: 25 Jul 2024, 1:04 PM IST
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शक्करगढ़.(भीलवाड़ा) महादेव की भक्ति का पर्व सावन शुरू हो गया। इसी सावन में शाहपुरा जिले के शक्करगढ़ कस्बे का संकट हरण हनुमत धाम मंदिर भी आस्था का केन्द्र बना है। यहां का शिवलिंग सम्भवतया राजस्थान का इकलौता शिवलिंग होगा, जो पारे से बना है। इसका वजन सुन आप चौक जाएंगे। यह देखने में छोटा सा लगता है, लेकिन इसका वजन 251 किलोग्राम है। यह पूरी तरह पारे से बना है। मान्यता है कि किसी भी शिवलिंग पर 100 बार अभिषेक करो और इस पारे के शिवलिंग पर एक बार अभिषेक करने के बराबर पुण्य मिलता है। इसकी पूजा-अर्चना और अभिषेक से उतना फल मिलता है जितना कि सौ बार अभिषेक का।

उज्जैन से लाया गया

इस शिवलिंग को शक्करगढ़ के अमर निरंजनी आश्रम के स्वामी जगदीश पुरी महाराज के आग्रह पर महाकाल की भूमि उज्जैन से सिद्ध संत स्वामी नारदा नंद महाराज ने शास्त्रीय विधि से शिवलिंग का निर्माण किया। 18 फरवरी 2023 को उज्जैन से शक्करगढ़ लाया गया और 22 फरवरी को हनुमत धाम में प्राण प्रतिष्ठा हुई। सावन में दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे है।

पारद शिवलिंग में ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों मौजूद

शिव पुराण एवं अन्य शास्त्रों के अनुसार पारदेश्वर शिवलिंग पूजन एवं दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल पदार्थ के रूप में होती है। जो की बुखार नापने के थर्मामीटर में काम आता है। इस तरल पदार्थ को चांदी एवं औषधीय पदार्थ मिलाकर ठोस रूप में तैयार किया गया। पारे से शिवलिंग बनाने का अधिकार सिर्फ सन्यासी संतों को होता है। पारा भगवान शिव का अत्यंत प्यारा प्रिय पदार्थ है। शिवजी की तपस्या के साक्षात तेज पारा माना गया। पारे से निर्मित शिवलिंग की पूजा व स्पर्श करने से पूजा करने व दर्शन करने वालों पर तंत्र मंत्र का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। पारदेश्वर महादेव दर्शन पूजन से विद्या एवं लक्ष्मी की अभिवृत्ति होती है। पारद शिवलिंग में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों ही देव विद्यमान रहते हैं। यहां राजस्थान ही नहीं अन्य राज्यों के श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते है।

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25 Jul 2024, 1:04 PM IST
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