भारी बरसात के चलते 868 साल प्राचीन जैसलमेर के विश्व विख्यात सोनार दुर्ग के बुर्ज की दीवार मंगलवार सुबह अचानक भरभरा कर गिर गई और बड़े-बड़े पत्थर व मलबा नीचे गिर गया। गनीमत यह रही कि इस वाकये में कोई जनहानि नहीं हुई।
भारी बरसात के चलते 868 साल प्राचीन जैसलमेर के विश्व विख्यात सोनार दुर्ग के बुर्ज की दीवार मंगलवार सुबह अचानक भरभरा कर गिर गई और बड़े-बड़े पत्थर व मलबा नीचे गिर गया। गनीमत यह रही कि इस वाकये में कोई जनहानि नहीं हुई। शिव मार्ग की तरफ वाले हिस्से की इस ऐतिहासिक दीवार गिरने के बारे में सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन से जुड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बैरिकेड लगा कर दोनों तरफ से आवाजाही को बंद करवाया। दीवार के गिरने का वाकया सुबह करीब 11 बजे हुआ। जब जोरदार आवाज के साथ बारिश के पानी में भीगी ऐतिहासिक दीवार के पत्थर व मलबा गिरने लगे। एकबारगी तो इसके नीचे वाले हिस्से के दुकानदार व रहवासी सकते में आ गए। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने पूर्व में ही बरसात के दौरान सोनार दुर्ग के पुराने मकानों व दुर्ग के हिस्सों को खतरे का मामला प्रमुखता से उठाया था। सोनार किले को पूर्व में आई मूसलाधार बरसातों के दौरान नुकसान पहुंचता रहा है। गोपा चौक क्षेत्र में परकोटे की दीवार भी बरसात के प्रहार से गिर गई थी।
गौरतलब है कि जैसलमेर दुर्ग की देखरेख का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जिम्मे है। संरक्षित स्मारकों की श्रेणी में आने की वजह से जैसलमेर दुर्ग में परकोटे सहित अन्य ऐतिहासिक हिस्सों का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण का कार्य एएसआई करवाता है। हाल में शिव मार्ग से लगते परकोटे की दीवार के एक हिस्से का कार्य करवाया गया है। अब भी उससे लगती कम से कम 200 मीटर परकोटे की दीवार के जीर्णोद्धार सहित किले के बाहरी व भीतरी हिस्से में कई जगहों की सार-संभाल की जरूरत है।