मुख्यमंत्री तक पहुंची बात, कलेक्टर ने आते ही दिए थे संकेत, वास्तविक कार्य किसी के रुकेंगे नहीं, गलत होंगे नहीं सागर. जिले के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच चल रही तकरार खुलकर सामने आ गई है। संगठन चुनाव की तैयारियों को लेकर रविवार को सागर पहुंचे भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल से विधायकों […]
मुख्यमंत्री तक पहुंची बात, कलेक्टर ने आते ही दिए थे संकेत, वास्तविक कार्य किसी के रुकेंगे नहीं, गलत होंगे नहीं
सागर. जिले के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच चल रही तकरार खुलकर सामने आ गई है। संगठन चुनाव की तैयारियों को लेकर रविवार को सागर पहुंचे भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल से विधायकों ने एकजुट होकर कलेक्टर संदीप जी आर, एसपी विकास शाहवाल व जिला पंचायत सीइओ विवेक केवी की शिकायत की। ये मुद्दा दूसरे दिन भी गर्माया रहा। सरकारी दफ्तरों और पार्टी कार्यालयों में इसकी चर्चा रही। सूत्रों की मानें तो अफसरों और विधायकों के बीच चल रही तकरार सीएम तक पहुंच चुकी है।
बैठक के दौरान विधायकों ने बताया कि कुछ समय पहले प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल के दौरे के समय भी कलेक्टर-एसपी अनुपस्थित रहे। अपर कलेक्टर और एडिश्नल एसपी से मंत्री शुक्ल के सामने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने की बात की थी। इस बैठक में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, जयंत मलैया, शहर विधायक शैलेंद्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार, दमोह से जबेरा विधायक धर्मेंद्र लोधी सहित संभाग के अन्य विधायक उपस्थित थे।
कलेक्टर संदीप जी. आर के कुछ कार्यों को लेकर शहर में उनकी सराहना हो रही है। इसमें एक तो स्कूल शिक्षा विभाग की चौपट व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास और दूसरा बड़ी संख्या में अनुकंपा के लंबित प्रकरणों का निराकरण करना। इसके अलावा उन्होंने कलेक्टर कार्यालय के साथ प्रशासनिक विभागों में भी चल रही अधिकारियों-कर्मचारियों की मनमर्जी रोकी है। वहीं जिले में आते ही उन्होंने संकेत दिए थे कि वास्तविक कार्य के लिए कहने की जरूरत नहीं होगी, गलत कार्य होंगे नहीं।
पुलिस अधीक्षक विकास शाहवाल की जिले के थानों पर भी पकड़ नहीं है। इस बात की पुष्टि उनकी पदस्थापना होने के बाद घटित दो बड़ी वारदातें कर रहीं हैं, जिसमें पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद कुमार को दखल करना पड़ा। पहला मामला अगस्त में बांदरी में सामने आया जहां लगभग 12 करोड़ रुपए कीमत के आइफोन की लूट हुई। इसके बाद हालही में देवरी में एक्सीडेंटल कार में डोडा चूरा के मामले में भी सीधा आइजी वर्मा को दखल देना पड़ा था।