proud of Ashish Sharma’sनरसिंहपुर. नक्सलियों से डटकर मुकाबला करते हुए शहीद हुए जिले के वीर सपूत हॉकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा की पार्थिव देह को नमन करने बोहानी गांव में हजारों लोगों की मौजूदगी रही। गुरूवार की दोपहर जैसे ही बालाघाट से शहीद की पार्थिव देह लेकर आ रहे पुलिस के विशेष वाहन ने जिले की […]
proud of Ashish Sharma'sनरसिंहपुर. नक्सलियों से डटकर मुकाबला करते हुए शहीद हुए जिले के वीर सपूत हॉकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा की पार्थिव देह को नमन करने बोहानी गांव में हजारों लोगों की मौजूदगी रही। गुरूवार की दोपहर जैसे ही बालाघाट से शहीद की पार्थिव देह लेकर आ रहे पुलिस के विशेष वाहन ने जिले की सीमा में प्रवेश किया तो हाइवे पर जगह-जगह मौजूद आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों ने शहीद की पार्थिव देह को नमन करते हुए पुष्पवर्षा की। हर व्यक्ति आशीष की वीरता और शहादत से गर्वित रहा लेकिन आंखे नम रहीं। शहीद के गृहग्राम बोहानी में सुबह से ही लोगों का शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आना शुरू हो गया था। जैसे ही पार्थिव देह को लेकर पहुंचे वाहन का बोहानी में प्रवेश हुआ और अंतिम यात्रा शुरू हुई तो पूरा गांव शहीद आशीष शर्मा अमर रहे के नारों से गूंज उठा। क्या गांव के क्या बाहर से आए लोगों की हर किसी की आंख अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए ललायित थी।
बोहानी गांव में बुधवार की दोपहर बाद से ही शहीद आशीष के पिता देवेंद्र शर्मा, मां शर्मिला शर्मा व अन्य परिजनों को सांत्वना देने लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। माता-पिता हो या परिवार के अन्य सदस्य, गांव के लोग हर कोई आशीष को याद कर रहा था। बताया जाता है कि आशीष की कुछ दिनों पूर्व ही मां से सामान्य बात हुई थी जिसमें आगामी समय में होने वाली शादी की तैयारियों पर बात हुई थी।
आशीष शर्मा की शहादत पर प्रदेश को गर्व है
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहीद आशीष शर्मा की पार्थिक देह पर पुष्प-चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने पार्थिक देह को कांधा भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंस्पेक्टर आशीष शर्मा ने नक्सल विरोधी अभियान में अदम्य साहस का परिचय देते हुए कर्तव्य पथ पर सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि आशीष शर्मा की शहादत पर प्रदेश को गर्व है। शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपए की सम्मान निधि प्रदान की जाएगी। साथ ही बोहानी गांव में शहीद आशीष शर्मा के नाम से एक पार्क और स्टेडियम भी विकसित किया जाएगा। इससे भावी पीढिय़ों को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा मिलती रहे और उनकी स्मृति अक्षुण्ण बनी रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहीद आशीष शर्मा के छोटे भाई को शासकीय नियमों में शिथिलता बरतते हुए सब-इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय परिवार को सम्बल देने और शहीद के अदम्य साहस को सदैव याद रखने और आमजन में राष्ट्रप्रेम के लिऐ प्रेरित करने के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।
खापा के पास पंचायत मंत्री ने पुष्पचक्र अर्पित किया
बालाघाट से सुबह करीब 9.30 बजे शहीद की पार्थिव देह को लेकर विशेष वाहन निकला, जिसने दोपहर में जिले की सीमा में प्रवेश किया। ग्राम खापा के पास प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों, नागरिकों ने शहीद को नमन करते हुए पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए। विशेष वाहन के आगे-पीछे कई और वाहनों का काफिला रहा। लोग पता करते रहे कि अब वाहन कहां पहुंच रहा है उसके पहले ही शहीद के अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों की मौजूदगी हाइवे किनारे होती रही। खापा से बोहानी गांव तक जिले का ऐसा कोई भी हिस्सा नहीं रहा जहां गांव-शहर के आसपास लोगों की मौजूदगी न हो।
मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री ने दिया कांधा
शहीद की अर्थी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों, शहीद के परिजनों ने भी कांधा दिया। शहीद की पार्थिव देह को राघव कृषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान जहां अंत्येष्टि हुईं वहां एक स्थान पर रखा गया। जहां मुख्यमंत्री समेत अन्य मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ने पुष्पचक्र, पुष्प अर्पित करते हुए शहीद को नमन किया।
कामकाज, दुकानें बंद कर लोग करते रहे आशीष का इंतजार
बोहानी गांव का माहौल गुरूवार को पूरी तरह गमगीन रहा, खेती, मजदूरी के कार्य करने कोई नहीं गया, दुकानें, स्कूल बंद रहे। हर किसी की नजरें सडक़ पर टकटकी लगाए रहीं कि उनके अपने चहेते वीर सपूत आशीष को लेकर कब विशेष वाहन आ रहा है। बड़े-बुर्जुगों से लेकर आसपास गांवों और क्षेत्र के लोगों में आशीष से जुड़े संस्मरणों की बातें होतीं रहीं।
दशकों पुरानी परंपराएं टूटी, महिलाएं भी अंत्येष्टि स्थल तक पहुंची
आमतौर पर महिलाओं के अंतिम यात्रा में शामिल न होने व अंत्येष्टि स्थल तक नहीं जाने की मान्यताएं हैं लेकिन गुरूवार को यह मान्यताएं टूट गईं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे भी न केवल अंतिम यात्रा में शामिल हुए बल्कि अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचे और भारत माता की जय, शहीद आशीष अमर रहे के नारे लगते रहे।
दोस्तों ने कहा नौकरी के बाद भी नहीं बदला था आशीष
शहीद आशीष के गांव के तमाम दोस्त भी अपने मित्र के इस तरह असमय जाने से दुखी थे लेकिन उन्हें गर्व था कि उनके मित्र ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया वह हमेशा याद किया जाएगा। दोस्तों ने कहा कि आशीष बचपन में जैसा था वैसा ही उसका व्यवहार नौकरी के बाद भी रहा। छुट्टियों में जब भी आता था तो सभी से बड़े अपनेपन से मिलता था। हर मित्र के पास आशीष से जुड़ी तमाम यादें थीं।
चाचा बोले— बेहद सौम्य, शांत और साहसी था हमारा आशीष
शहीद आशीष शर्मा के रिश्ते के चाचा शिवकुमार शर्मा ने बताया कि बचपन से ही आशीष बेहद शर्मीले और शांत स्वभाव के थे। गांव में जब भी रामलीला होती थी, आशीष सीता माता की भूमिका निभाते थे। शिवकुमार ने बताया कि जब मैं रामलीला में रावण बनता था, तो आशीष बार-बार कहता था कि चाचा संवाद धीरे बोलना, जोर से मत चिल्लाना, नहीं तो मैं अपने संवाद भूल जाऊंगा। आशीष का स्वभाव संकोची जरूर था, लेकिन उनके अंदर अदम्य साहस भी था। पूरे प्रदेश को आशीष की शहादत पर गर्व है। लेकिन परिवार को जो क्षति हुई है, उसकी पूर्ति कभी नहीं हो सकती। आशीष से जुड़ी यादें गांव के हर व्यक्ति के मन में ताजा हैं। लोग उनके स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठा और सरलता को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
बोहानी में दिनभर लगा रहा लोगों के आने का क्रम
बोहानी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदयप्रताप सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, सांसद चौ. दर्शन सिंह, पूर्व सांसद कैलाश सोनी, विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल, महेंद्र नागेश, डीजीपी कैलाश मकवाना, संभागायुक्त धनजंय सिंह, पूर्व विधायक संजय शर्मा, कलेक्टर रजनी सिंह, एसपी डॉ. ऋषिकेश मीना, एएसपी संदीप भूरिया समेत अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, नागरिकों की मौजूदगी रही।