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Gwalior… चेतकपुरी रोड: कचरे-मलबे पर डामर पोत बना दी सडक़, सभी 8 सैंपल फेल

सडक़ में अचानक गहरी सुरंग धंसने से पूरे देश में बदनाम हुई ग्वालियर की वीआइपी चेतकपुरी सडक़ के निर्माण और पैचवर्क में नगर निगम व ठेकेदारों की मिलीभगत से हुए भ्रष्टाचार की परतें अब ...
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Sep 20, 2026
gwalior chetakpuri road
gwalior chetakpuri road

ग्वालियर. सडक़ में अचानक गहरी सुरंग धंसने से पूरे देश में बदनाम हुई ग्वालियर की वीआइपी चेतकपुरी सडक़ के निर्माण और पैचवर्क में नगर निगम व ठेकेदारों की मिलीभगत से हुए भ्रष्टाचार की परतें अब हाईकोर्ट में तार-तार हो गई हैं। जीवाजी क्लब (चेतकपुरी रोड) से फूलबाग चौपाटी तक हाल ही में बनी सडक़ से हाईकोर्ट कमीशन द्वारा उठाए गए सभी 8 सैंपल तकनीकी मानकों पर पूरी तरह फेल पाए गए हैं।

जांच में सबसे चौंकाने वाला सच यह सामने आया है कि गड्ढों को भरने के लिए नियमानुसार गिट्टी और कंक्रीट का इस्तेमाल करने के बजाय उनमें मलबा और ढीला कचरा दबा दिया गया और ऊपर से डामर की पतली परत पोत दी गई। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस घोर फर्जीवाड़े पर सख्त नाराजगी जताते हुए नगर निगम कमिश्नर को 21 सितंबर को व्यक्तिगत शपथपत्र (हलफनामा) पेश करने और निजी टेङ्क्षस्टग फर्म का रिकॉर्ड जब्त करने के कड़े आदेश दिए हैं।

कागजी बाजीगरी: जब डिजाइन ही सितंबर में बना, तो जुलाई में टेस्ट कैसे?

हाईकोर्ट के सामने जब सडक़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और टेङ्क्षस्टग फाइलें खोली गईं, तो धोखाधड़ी का ऐसा घालमेल सामने आया जिसे देखकर अदालत भी दंग रह गई।

  • तारीखों की बाजीगरी: रिकॉर्ड में दिखाया गया कि डीबीएम और बीसी के नमूने 10 जुलाई 2024 को लिए गए और लैब ने अगले ही दिन 11 जुलाई 2024 को जांच रिपोर्ट थमा दी।
  • 2 महीने बाद बना डिजाइन: तकनीकी नियमों के मुताबिक सैंपल की जांच जॉब मिक्स डिजाइन के आधार पर होती है। लेकिन फाइल में यह डिजाइन दो महीने से भी अधिक समय बाद यानी 16 सितंबर 2024 को तैयार होना दिखाया गया है।
  • कोर्ट का तीखा सवाल: हाईकोर्ट ने तल्ख लहजे में पूछा कि जब जॉब मिक्स डिजाइन ही 16 सितंबर को बना, तो लैब ने 11 जुलाई को किस आधार पर टेङ्क्षस्टग कर रिपोर्ट थमा दी ? कोर्ट ने निगमायुक्त को निजी फर्म ‘राजनंदनी एंटरप्राइजेज’ के मूल आवक-जावक रजिस्टर और रिकॉर्ड तत्काल जब्त कर अदालत में पेश करने का फरमान सुनाया।

8 सैंपलों का रिपोर्ट कार्ड… कहीं डामर कम, कहीं बेस ही नदारद

  • सैंपल 1 (जीवाजी क्लब गेट-3 के सामने): बिटुमेन (डामर) कंटेंट में फेल। सीआरएम (क्रंब रबर मॉडिफाइड बिटुमेन) शून्य मिला। जमीन पर अर्थवर्क (मिट्टी का प्राथमिक काम) तक नहीं किया था।
  • सैंपल 2 (खंडेलवाल स्वीट््स के सामने): बिटुमेन कंटेंट और ग्रेङ्क्षडग दोनों में फेल। सीआरएम गायब, डब्ल्यूएमएम (गिट्टी) तय मानक से अत्यधिक बारीक मिली।
  • सैंपल 3 व 4: बिटुमेन कंटेंट, बल्क डेंसिटी और बाइंडर कंटेंट तीनों में फेल। सामग्री ओवरसाइज पाई गई, अर्थवर्क नदारद।
  • सैंपल 5 व 6: बिटुमेन कंटेंट और बल्क डेंसिटी में पूरी तरह फेल। सीआरएम गायब।
  • सैंपल 7 व 8 (फूलबाग चौपाटी): बिटुमेन, बल्क डेंसिटी, ओएमसी, एमडीडी और सीबीआर टेस्ट में पूरी तरह फेल पाए गए।

टेंडर शर्तों की धज्जियां: जैक हैमर से कङ्क्षटग नहीं, न रोलर चला

कोर्ट ने नगर निगम और मेंटेनेंस का काम करने वाली कंपनी मेसर्स ग्राम्स इन्फ्राटेक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए 3 साल के अनुबंध की शर्तें पढकऱ सुनाईं।

  1. सीधी कङ्क्षटग का नियम: गड्ढों को इलेक्ट्रॉनिक जैक हैमर या कटर से 100 से 150 मिमी की गहराई में सीधा (वर्टिकल) और तय ज्यामितीय आकार में काटना अनिवार्य था।
  2. सफाई का नियम: सामग्री भरने से पहले गड्ढे के अंदर से सारा ढीला कचरा, पत्थर और पानी साफ किया जाना था, फिर वाइब्रेट कर भारी रोलर से कॉम्पेक्शन करना था।
  3. पेनल्टी का प्रावधान: अनुबंध के अनुसार समय पर गुणवत्तापूर्ण मरम्मत न करने पर 1,000 रुपए प्रति गड्ढा प्रतिदिन पेनल्टी का प्रावधान है, लेकिन अफसरों ने ठेकेदार पर कार्रवाई के बजाय मिलीभगत से भुगतान की हरी झंडी दे दी।
Updated on:
20 Sept 2026 05:56 pm
Published on:
20 Sept 2026 05:56 pm