बार-बार सर्वर फेल, तकनीकी खामियां और अधूरी ऑनलाइन तैयारी के कारण आम नागरिकों को एक बार फिर एजेंटों और दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्वालियर. परिवहन विभाग सहित कई सरकारी सेवाओं को फेसलेस बनाकर पारदर्शिता और सहूलियत का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। बार-बार सर्वर फेल, तकनीकी खामियां और अधूरी ऑनलाइन तैयारी के कारण आम नागरिकों को एक बार फिर एजेंटों और दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जो काम घर बैठे, मुफ्त या नाममात्र शुल्क में होना था, उसके लिए लोगों को अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। आरटीओ सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 250 ऑनलाइन लाइसेंस आवेदन आते हैं। इसके अलावा वाहन ट्रांसफर, वाहन विक्रय और नए रजिस्ट्रेशन के भी बड़ी संख्या में आवेदन ऑनलाइन किए जा रहे हैं।
SMS लिंक सिस्टम बना परेशानी की वजह
ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत अब पूरा कार्ड SMS लिंक के माध्यम से भेजा जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
कई आवेदकों को लिंक समय पर नहीं मिलता
कई बार SMS काफी देर से पहुंचता है
जिनके मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं या नेटवर्क समस्या है, उन्हें संदेश ही नहीं मिलता
ऐसे में आवेदक असमंजस में पड़ जाते हैं और जानकारी के लिए आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं।
आवेदकों के सामने ये बड़ी समस्याएं
हेल्पडेस्क की कमी
फेसलेस सिस्टम लागू होने के बावजूद कॉल सेंटर, चैट सपोर्ट और स्थानीय हेल्पडेस्क प्रभावी नहीं हैं। शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान नहीं मिलता।
▪️ सर्वर डाउन सबसे बड़ी परेशानी
वेबसाइट स्लो या डाउन
फॉर्म सबमिट नहीं होता
भुगतान फेल हो जाता है
रिफंड में देरी
इन हालातों में लोग मजबूरी में एजेंटों का रास्ता चुन लेते हैं।
डॉक्यूमेंट अपलोड एरर
सही फॉर्मेट और साइज के बावजूद दस्तावेज अपलोड नहीं हो पाते।
तकनीकी एरर मैसेज आम व्यक्ति की समझ से बाहर होते हैं। न स्पष्ट गाइडलाइन है, न रियल-टाइम मदद। इसका फायदा एजेंट उठाकर अतिरिक्त शुल्क वसूलते हैं।
“एजेंटों पर नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह ऑनलाइन होंगी। इसके बाद बिचौलियों की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
— विक्रमजीत सिंह कंग, आरटीओ ग्वालियर