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खरमास की समाप्ति और शुक्र का उदय: 4 फरवरी से मचेगी शादियों की धूम

मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध अब समाप्त होने जा रहा

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मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध अब समाप्त होने जा रहा

उज्जैन. शादी-ब्याह के इच्छुक परिवारों के लिए खुशखबरी है। पिछले खरमास की समाप्ति और शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध अब समाप्त होने जा रहा है। आगामी 4 फरवरी से एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी और बाजारों में शादियों की रौनक लौटेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर लगने वाले खरमास और शुभ कार्यों के कारक शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह जैसे संस्कार वर्जित थे। चूंकि विवाह के लिए शुक्र और गुरु दोनों का उदय होना अनिवार्य माना जाता है, इसलिए अब तक शादियों के मुहूर्त नहीं बन पा रहे थे। 4 फरवरी से शुरू हो रहा शादियों का यह सिलसिला लगातार चलेगा। पंडितों के अनुसार, फरवरी माह में विवाह के कई श्रेष्ठ मुहूर्त बन रहे हैं।

बाजारों में भी बढ़़ी हलचल

विवाह की तारीखें नजदीक आते ही उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्रों में भी व्यापारिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बैंड-बाजे, टेंट, कैटरिंग और ज्वेलरी मार्केट में बुकिंग का दौर जोरों पर है। धर्मशालाएं और मैरिज गार्डन भी आगामी सीजन के लिए पूरी तरह बुक हो चुके हैं। बसंत पंचमी पर विवाह, मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश जैसे मुहूर्त माने जाते हैं, किंतु इस बार शुक्र का तारा अस्त होने से यह सभी उपक्रम नहीं हुए। बसंत पंचमी पर मालवा निमाड़ ही नहीं, संपूर्ण भारत में अबूझ मुहूर्त मानकर के सभी प्रकार के मांगलिक कार्य करने की परंपरा रही है, किंतु पंचांग की गणना के अनुसार और धर्मशास्त्र की मान्यता के अनुसार देखें तो जब शुक्र का तारा या गुरु का तारा अस्त हो ऐसे समय विवाह आदि नहीं होते इसी दृष्टि से इस बार बसंत पंचमी पर विवाह का कोई मुहूर्त नहीं था।

विवाह के मुहूर्त कब-कब

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार फरवरी में 4,10,20 तथा मार्च में 9,11,12,14 को। अप्रैल में 20,21,26 को। मई में 5,6,7,8,14 को जून में 19,20,22,23,26 को। जुलाई में 1,6,7,11 को। (नोट:- इस बार अधिक मास ज्येष्ठ माह में आने वाला है जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा इस दौरान विवाह आदि कार्य नहीं किये जा सकेंगे साथ ही शुद्ध ज्येष्ठ मास का जब आरंभ होगा तो विवाह के योग पुनः बनेंगे किंतु जो घर का बड़ा बेटा या बड़ी बेटी हो तो बड़े बच्चों का विवाह ज्येष्ठ मास में नहीं करना चाहिए।

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