फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद पति-पत्नी पिछले 5 साल से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन आज तक न तो कॉलोनाइजर पर मामला दर्ज हो सका और न ही उनकी राशि वापस हुई।
शासन-प्रशासन की लाख सख्ती के बाद भी जमीनों का फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में सामने आया, जहां एक पुलिसकर्मी ने खुद के साथ हुए फर्जीवाड़े की शिकायत की। पुलिसकर्मी व उनकी पत्नी ने कॉलोनाइजर से कनेरादेव के पास 2 प्लाट खरीदे, लेकिन बाद में पता चला कि कॉलोनाइजर ने जिस जमीन को खुद का बताकर रजिस्ट्री की है, वह वन विभाग की भूमि है। फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद पति-पत्नी पिछले 5 साल से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन आज तक न तो कॉलोनाइजर पर मामला दर्ज हो सका और न ही उनकी राशि वापस हुई। पुलिस लाइन में रहने वाली डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की उच्च श्रेणी लिपिक लक्ष्मी जाटव पत्नी शक्ति चौधरी ने बताया कि उन्होंने मकरोनिया के नेहा नगर निवासी कॉलोनाइजर विजय पुत्र अनंतराम शुक्ला से 2013 में आमेट मौजा के खसरा नंबर 417/3 में 186 व 187 नंबर से नक्शा में दर्शाए दो प्लाट खरीदे थे, जिनका कुल क्षेत्रफल 4330 वर्गफीट था। कॉलोनाइजर शुक्ला ने एग्रीमेंट में उक्त जमीन को कॉलोनी बताया और रोड, बिजली, पानी आदि सुविधाएं मुहैया कराने का लेख किया लेकिन जब खरीददार ने जगह को लेकर पड़ताल की तो पता चला कि वह शासन द्वारा वन विभाग के लिए आवंटित है।
मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से 181 लोग अपनी समस्याओं को लेकर शिकायत करने पहुंचे। कलेक्टर संदीप जीआर, जिला पंचायत सीइओ विवेक केवी, संयुक्त कलेक्टर आरती यादव ने लोगों की समस्याओं को सुना और कुछ शिकायतों का मौके पर ही निराकरण किया। वहीं अन्य शिकायतों को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।