जयपुर. शहर के स्मारकों पर क्रिसमस से ही पर्यटकों का रेला उमड़ रहा था और यह माना जा रहा था कि 31 दिसंबर को आमेर,हवामहल,जंतर-मंतर, अल्बर्ट हॉल देखने 70 से 80 हजार पर्यटक पहुंच सकते हैं। लेकिन स्मारकों पर पर्यटकों को अपने वाहनों की पार्किंग की जद्दोजहद का असर साफ दिखा। स्मारकों के रास्ते में […]
जयपुर. शहर के स्मारकों पर क्रिसमस से ही पर्यटकों का रेला उमड़ रहा था और यह माना जा रहा था कि 31 दिसंबर को आमेर,हवामहल,जंतर-मंतर, अल्बर्ट हॉल देखने 70 से 80 हजार पर्यटक पहुंच सकते हैं। लेकिन स्मारकों पर पर्यटकों को अपने वाहनों की पार्किंग की जद्दोजहद का असर साफ दिखा। स्मारकों के रास्ते में जाम व स्मारकों पर वाहनों को पार्किंग मिलगी या नहीं इसी आशंका के चलते पर्यटकों ने स्मारकों पर जाना मुनासिब नहीं समझा और होटलों में ही रह कर समय बिताया। यही वजह रही कि साल के अंतिम दिन स्मारकों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या महज 41 हजार 500 तक ही सिमट कर रह गई। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि मावठा पानी भरा है और इसमें कई मगरमच्छ भी बताए जा रहे हैं। यहां पार्किंग माफिया ने पर्यटकों की वाहनों की पार्किंग करा दी। ऐसे में पर्यटकों में मन किसी अनहोनी का भय बना रहा। उधर पर्यटकों की इस परेशानी पर भी पुरातत्व विभाग के आला अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। उधर बड़ा सवाल यह भी है कि मावठे में पार्किंग ही नहीं है तो किसके इशारे पर पार्किंग माफिया ने यहां वाहनों को खड़ा करवाया। इन हालात पर विरासत संरक्षण को लेकर चिंतित प्रबुद्धजनों ने भी आपत्ति जताई है।