जाम से निपटने शुरू की गई थी ट्रैफिक पुलिस की ईगल मोबाइल सेवा, दो साल में ही दम तोड़ता सिस्टम
जाम से निपटने शुरू की गई थी ट्रैफिक पुलिस की ईगल मोबाइल सेवा, दो साल में ही दम तोड़ता सिस्टम
ग्वालियर। शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से त्वरित निपटने के उद्देश्य से शुरू की गई ट्रैफिक पुलिस की ईगल मोबाइल सेवा फिलहाल निष्क्रिय पड़ी हुई है। दो साल पहले मॉडिफिकेशन कराकर ट्रैफिक पुलिस को सौंपी गईं 11 बुलेट मोटरसाइकिलें आज यातायात थानों में खड़ी धूल खा रही हैं। जिन बाइकों को सड़कों पर लगातार पेट्रोलिंग कर जाम खुलवाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वे देखरेख के अभाव में इस्तेमाल के लायक नहीं बचीं।
बड़े दावे, कमजोर अमल
ईगल मोबाइल सेवा की शुरुआत के समय दावा किया गया था कि शहर के किसी भी हिस्से में ट्रैफिक जाम की सूचना मिलने पर बाइक सवार ट्रैफिक जवान तुरंत मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभालेंगे। योजना के तहत हर बाइक पर दो ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती और जामग्रस्त क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग का प्रावधान किया गया था, लेकिन शुरुआती दिनों के बाद यह व्यवस्था धीरे-धीरे ठप होती चली गई।
मेंटेनेंस बजट होने के बावजूद अनदेखी
यातायात विभाग के अनुसार, इन बाइकों के मेंटेनेंस के लिए प्रति वाहन हर साल 5 हजार रुपये का प्रावधान है। इसके बावजूद बाइकों को समय पर दुरुस्त नहीं कराया गया। हालत यह है कि महीनों से इन वाहनों का उपयोग नहीं हुआ है।
सुविधाओं से लैस, फिर भी बेकार
ईगल मोबाइल दस्ते की बाइकों में एनाउंसमेंट सिस्टम, हूटर और वायरलेस सेट जैसी सुविधाएं भी लगाई गई थीं, ताकि ट्रैफिक कंट्रोल में आसानी हो सके। हालांकि मॉनिटरिंग की कमी और लापरवाही के चलते ये संसाधन भी बेकार साबित हो रहे हैं।
“पुरानी हो गई हैं बाइक” बनी वजह
यातायात पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बाइक पुरानी हो चुकी हैं और फोर्स उन्हें चलाने में रुचि नहीं दिखा रही, इसलिए उन्हें थानों में खड़ा कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रखरखाव और प्रभावी निगरानी होती तो यह सेवा अब भी कारगर हो सकती थी।
निगरानी व्यवस्था भी रही कमजोर
ईगल मोबाइल सेवा की शुरुआत के दौरान इसकी निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई थी। कुछ समय तक यह दस्ता सक्रिय रहा, लेकिन बाद में मॉनिटरिंग कमजोर पड़ने से पूरी व्यवस्था ठप हो गई।
संसाधन हैं, जरूरत इच्छाशक्ति की
शहर में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव के बीच ईगल मोबाइल सेवा का निष्क्रिय होना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और नियमित समीक्षा से इस सेवा को दोबारा प्रभावी बनाया जा सकता है।