दिन की बजाय घंटे के हिसाब से कमरे देने वाले होटल व कैफे की आई बाढ़ सी, जंक्शन के चंडीगढ़ हॉस्पिटल के आसपास गलियों में चल रहे 20 से अधिक संदिग्ध होटल-कैफे, नागरिकों की शिकायत पर पुलिस ने किया निरीक्षण
हनुमानगढ़. कैफे के काउंटर व टेबल पर तो फास्ट फूड के विभिन्न आयटम के मैन्यू रखे हुए थे। मगर भीतर छोटे-छोटे दड़बेनुमा कैबिन व कमरों में कंडोम, गर्भ निरोधक गोलियां, सेक्सवद्र्धक दवाई के ढेर मिले। शराब की खाली बोतलें व गिलास, नशीले पदार्थों के सेवन में इस्तेमाल होने वाली पन्नियां वगैरह भी मिली। यह हालात रविवार को तब नजर आए जब नागरिकों की मांग पर जंक्शन थाना पुलिस ने कुछ संदिग्ध कैफे व होटल की जांच की। खास बात यह कि कई जगहों पर संदिग्ध होटलों में आगन्तुक रजिस्टर गड़बड़ मिले। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था।
जानकारी के अनुसार जंक्शन के चंडीगढ़ हॉस्पिटल रोड व उसके आसपास गलियों में पिछले कुछ महीनों में धड़ाधड़ कैफे व होटल खुले हैं। कुछ ही दूरी में 20 से अधिक कैफे व होटल चल रहे हैं मानो वहां कोई टूरिस्ट पैलेस हो। इन जगहों पर दिन-रात संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं। संदिग्ध लडक़े व लड़कियां आते हैं। शनिवार रात कुछ युवकों में भिड़ंत हो गई। गाड़ी व बाइकों पर आए युवकों के गुटों ने चंडीगढ़ हॉस्पिटल रोड व पास की कॉलोनी की गलियों में काफी समय तक तांडव मचाया। इससे कॉलोनीवासी सहम गए तथा जंक्शन थाने में सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तथा एक थार गाड़ी व युवक को पकड़ कर थाने ले गई। शेष युवक चंपत हो गए। हंगामे से कॉलोनीवासी आक्रोशित हो गए तथा रात को थाने पहुंचे और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाकर उनको वापस भेज दिया। इसके बाद रविवार को कई नागरिक पुन: थाने पहुंचे तथा कॉलोनी क्षेत्र में खुले संदिग्ध होटल व कैफे का औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की मांग की। शाम को जंक्शन थाने के एएसआई कृष्ण बिश्नोई मय जाप्ता मौके पर पहुंचे और होटल व कैफे का निरीक्षण किया। इस दौरान नीरज गोयल, सोनू गोस्वामी, मदन भदरा, लंकित गोयल, जितेन्द्र महाजनी आदि नागरिक मौजूद रहे।
नागरिकों ने बताया कि इलाके में खुले संदिग्ध होटल व कैफे में युवकों के साथ नाबालिग लड़कियां आती हैं। जहां कंडोम व सेक्सवद्र्धक दवा मिल रही है, वहां कैसी गतिविधियां होती होंगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि नाबालिग लड़कियों को यौन शोषण व अपराधों से बचाना किसकी जिम्मेदारी है। अभिभावकों के अलावा बाल कल्याण समिति, पुलिस व प्रशासन की भी तो जिम्मेदारी बनती है। संदिग्ध होटल व कैफे के पंजीयन, काउंटर पर रजिस्टर व सीसीटीवी कैमरे आदि होने चाहिए।
होटलों में कमरा दिन के हिसाब से किराए पर मिलता है। मगर गलियों में कुकुरमुतों की तरह उगे होटल व कैफे में घंटे के हिसाब से कमरा व कैबिन किराए पर मिलता है। यह बीमारी केवल हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि नोहर, रावतसर सहित जिले के अन्य कस्बों में भी भयंकर रूप से फैली हुई है।
इस संबंध में पुलिस प्रशासन से लेकर नागरिक संगठन और राजनीतिक दलों तक ने चुप्पी साध रखी है।
यह भी चिंता का विषय विशेष अलर्ट या अन्य कारणों से पुलिस प्रशासन होटलों व धर्मशालाओं का कई बार निरीक्षण करती है। मगर इन बरसों में यह गलियों में जो संंदिग्ध होटल व कैफे खुले हैं, इनका निरीक्षण नहीं किया जाता। यह बात अपराधी भी जानते हैं। जाहिर है कि वे बड़े होटल या धर्मशाला की बजाय ऐसी जगहों पर ही रुकेंगे।