-साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर की टीम ने की कार्रवाई, 226 करोड़ की क्रिप्टो करेंसी के ट्रांजेक्शन का खुलासा, हमास-रूस-अमरीका के प्रतिबंधित संगठनों से लेनदेन का भंडाफोड़
Ahmedabad. गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) गांधीनगर की टीम ने टेरर फंडिंग नेटवर्क एवं अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इससे जुड़े 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 13 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, सवा लाख की नकदी जब्त की गई। आरोपियों के कई देशों की ओर से प्रतिबंधित एवं आतंकी संगठन फिलिस्तीन के हमास, यमन के अंसार अल्लाह, ईरान के आइआरजीसी-क्यूएफ, रूस के एक्सचेंज गारेंटेक्स और इलानशोर से जुड़ाव और आर्थिक लेनदेन का खुलासा हुआ है।
पकड़े गए आरोपियों में मोहसिन सादिक मोलाणी छीपा, एजाज पठान, मो. जैद सिद्दी, नावेद पठान, फैज अहमद चिस्ती, सलमान खान पठान, मोहसिन का पिता गुलाम सादिक अंसारी शामिल हैं। ये सभी अहमदाबाद के अलग-अलग इलाके के हैं। साथ ही मुंबई के जीशान मोतीवाला तथा हरियाणा के करनाल जिले का लवप्रीत मढारू भी शामिल है।
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की ओर से मंगलवार को संवाददाताओं को बताया गया कि पकड़े गए नौ आरोपियों में मुख्य आरोपी अहमदाबाद के सरखेज में रहने वाला मोहसिन है जो ब्रिटेन में 2023 से ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा है। वह टेलीग्राम ग्रुप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से व डार्क वेब के जरिए ब्रिटेन में ड्रग्स के ऑर्डर लेता था। उस ऑर्डर की जानकारी दुबई से ड्रग्स का नेटवर्क चलाने वाले मोहम्मद जुबेर पोपटिया को देता था। जुबेर ब्रिटेन के उसके नेटवर्क के माध्यम से ड्रग्स की डिलिवरी कराता था। साथ ही मोहसिन एक अन्य व्यक्ति सलमान अंसारी को भी इस प्रकार से ड्रग्स के ऑर्डर देता था। सलमान अक्टूबर 2024 से ब्रिटेन में ड्रग्स कारोबार और मनी लॉन्डरिंग के मामले में छह साल की कैद होने से वहीं जेल में है। जांच में सामने आया कि वह जेल में रहते हुए भी ड्रग्स का नेटवर्क अभी भी चला रहा है।
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अनुसार जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने के नेटवर्क के मुख्य सूत्रधारों में सलमान अंसारी और मोहम्मद जुबेर पोपटिया शामिल है। सलमान और जुबेर दोनों अहमदाबाद के मोहसिन के साथ मिलकर मोनेरा क्रिप्टो करेंसी वॉलेट के जरिए आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाता है। ये दोनों गुजरात में मोहसिन व अन्य के खातों में फंड ट्रांसफर करते जिसे मोहसिन व अन्य आंगडिया के जरिए नकद में प्राप्त करते। फिर सलमान के पिता गुलाम तक पहुंचाते थे। जुबेर के इस क्रिप्टो वॉलेट को नेशनल ब्यूरो फॉर काउंटर टेरर फाइनेंसिंग की ओर से 2025 में फ्रीज किया है जिस पर आतंकी संगठन हमास से जुड़ी दुबई कंपनी फॉर एक्सचेंज के साथ आर्थिक लेनदेन का आरोप है। इस नेटवर्क के वॉलेट में अमरीका के ऑफिस ऑफ फोरेन एसेट कंट्रोल की ओर से प्रतिबंधित यमन के आतंकी समूह अंसार अल्लाह (हुथी), ईरान के आइआरजीसी-क्यूएफ, रूस के एक्सचेंज गेरेन्टेक्स और इलान शोर के क्लस्टर में वॉलेट से फंड ट्रांसफर करने के सबूत मिले हैं। यह फंड आरोपियों ने खुद के ही वॉलेट से ट्रांसफर किए थे।
जांच में आरोपियों के क्रिप्टो वॉलेट में 225 करोड़ के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है। मोहसिन के खाते में 6.70 लाख डॉलर, जुबेर के अहमदाबाद के खाते में 48 लाख डॉलर, जीशान के मुंबई के खाते में 23 लाख डॉलर, फैज के खाते में 19.44 लाख डॉलर, अहमदाबाद के शाह यासरखान पठान के खाते में 9.51 लाख डॉलर, नावेद के खाते में 38 लाख डॉलर, लवप्रीत के खाते में 5.98 लाख डॉलर, एजाज के खाते में 11 लाख, जैद के खाते में 75 लाख डॉलर, भावनगर के तलाजा के क्रिप्टो वॉलेट में 65 हजार डॉलर के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है। इस प्रकार सभी अकाउंट मिलाकर कुल दो करोड़ 39 लाख अमरीकी डॉलर के ट्रांजेक्शन का पता चला, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत 226 करोड़ से ज्यादा है।