एपीएआर भरने की प्रक्रिया में प्रदेश में शिक्षा विभाग के आधे से ज्यादा जिलों के कर्मचारी कम दिखा रहे रुचि, वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन भरने की कवायद में हनुमानगढ़ टॉप फाइव में
हनुमानगढ़. एपीएआर मतलब व वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन भरने की प्रक्रिया में भी हनुमानगढ़ जिला मासिक रैंकिंग की तरह अग्रणी जिलों में शुमार है। पिछले सप्ताह तक प्रदेश में हनुमानगढ़ जिला एपीएआर भरने की कवायद में प्रदेश के टॉप फाइप जिलों में शामिल था तथा तीसरे स्थान पर काबिज था। वहीं अन्य जिलों की बात करें तो स्थिति यह थी कि आधे से अधिक जिलों में इस कार्य को अपेक्षानुरूप तवज्जो नहीं दी जा रही थी। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक इस कार्य से परहेज सा कर रहे थे।
प्रदेश में बूंदी व बारां क्रमश: पहले व दूसरे स्थान पर थे। इनके बाद तीसरे स्थान पर हनुमानगढ़ काबिज था। कई जिले तो ऐसे हैं कि टोटल वर्किंग की तुलना में 50 प्रतिशत से भी कम एप्लीकेशन क्रिएट हुई हैं। गौरतलब है कि वार्षिक मूल्यांकन प्रतिवेदन वर्ष में प्रत्येक कर्मचारी को एक बार स्वयं ऑनलाइन भरना होता है। राजस्थान शिक्षक संघ अम्बेडकर के जिलाध्यक्ष दीपक बारोटिया बताते हैं कि ऑनलाइन एपीएआर प्रक्रिया कर्मचारी हित में है। इससे किसी भी कर्मचारी को अनुचित लाभ या फिर मनमर्जी से उसके नुकसान से मुक्ति मिलती है।
जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ में टोटल वर्किंग 9237 थे। इनमें से 5416 एप्लीकेशन क्रिएट की जा चुकी थी तथा 4014 एप्लीकेशन उच्चाधिकारियों को फोरवर्ड की जा चुकी थी। जिले में सबमिशन रिपोर्टी प्रतिशत 42.64 प्रतिशत तथा सबमिशन रिपोर्टिंग 9.33 प्रतिशत थी। हनुमानगढ़ से ज्यादा बूंदी व बारां की सबमिशन रिपोर्टी प्रतिशत क्रमश: 45.4 व 44.88 प्रतिशत थी।
प्रदेश में जोधपुर, बाड़मेर, उदयपुर, अजमेर, नागौर सहित एक दर्जन के करीब जिलों की स्थिति तो यह है कि टोटल वर्किंग की तुलना में एप्लीकेशन ही 40 से 45 प्रतिशत तक क्रिएट की गई। करीब 18 जिलों में सबमिशन रिपोर्टी प्रतिशत बेहद कम होने पर वे रेड जोन में थे।
वार्षिक मूल्यांकन प्रतिवेदन भरने संबंधी प्रक्रिया की उपयोगिता की बात करें तो इसमें कर्मचारी को अपने कामकाज के आधार पर सारा विवरण देना पड़ता है। उसने नामांकन, अन्य विभागीय लक्ष्य हासिल करने, शिक्षण कार्य आदि में कैसा प्रदर्शन किया, यह सब प्रतिवेदन में भरना होता है। इसके आधार पर कर्मचारी अपने कार्य व ड्यूटी के प्रति गंभीर रहता है। इसके आधार पर ही पदोन्नति वगैरह की प्रक्रिया होती है। कर्मचारी के प्रतिवेदन भरने के बाद उसका कार्यालय अध्यक्ष उसको सत्यापित करता है। यदि वह कर्मचारी को श्रेष्ठ बताता है तो इसका आधार बताना होता है। यदि कर्मचारी को लापरवाह बताया जाता है तो उसका भी आधार बताना पड़ता है।
पहले वार्षिक प्रतिवेदन की प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसे एसीआर कहा जाता था। यह प्रतिवेदन हर साल नहीं भरा जाता था। केवल पदोन्नति आदि प्रक्रिया के दौरान एक साथ सात साल की एसीआर मांगी जाती थी। इससे अचानक से विभागीय कामकाज बढ़ जाता था। कर्मचारियों को भी एसीआर तैयार कराने में माथापच्ची करनी पड़ती थी। अब पिछले तीन-चार साल से यह प्रक्रिया ऑनलाइन हर साल होती है।