मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने किया आगाह मदुरै. मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने सोमवार को कांस्टेबलों और हेड कांस्टेबलों को अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने वाले 2021 के सरकारी आदेश का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया, साथ ही चेतावनी दी कि इसका पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की […]
मदुरै. मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने सोमवार को कांस्टेबलों और हेड कांस्टेबलों को अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने वाले 2021 के सरकारी आदेश का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया, साथ ही चेतावनी दी कि इसका पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।न्यायाधीश बट्टू देवानंद ने मदुरै के ऑस्टिनपट्टी थाने के हेड कांस्टेबल एम. सेंथिल कुमार की याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि सरकारी आदेश का उचित तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। यह देखते हुए कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि राज्य भर के हजारों पुलिसकर्मियों से संबंधित है, न्यायाधीश ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अनुपालन के दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।सरकार ने तर्क दिया था कि सभी जिलों में पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक या पाक्षिक अवकाश दिया जा रहा है। अतिरिक्त महाधिवक्ता वीरा कदीरवन ने तर्क दिया कि याचिका को जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में माना जाना चाहिए, क्योंकि याचिकाकर्ता ने अन्य पुलिसकर्मियों की शिकायतों को उठाया है, जो सेवा मामलों में विचारणीय नहीं है।
हर पुलिसकर्मी नहीं आ सकता न्यायालय
हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि तमिलनाडु में पुलिसकर्मियों की शिकायतों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई एसोसिएशन नहीं है। ऐसी स्थिति में, यह अपेक्षा करना अनुचित है कि प्रत्येक पुलिसकर्मी साप्ताहिक अवकाश का लाभ लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाए।न्यायाधीश ने बताया कि अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने के सरकार के फैसले का उद्देश्य कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, विशेष उप-निरीक्षक और उप-निरीक्षकों को अपने स्वास्थ्य की रक्षा करने और अपने परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति देना था। न्यायाधीश ने कहा, "हालांकि यह निर्णय सराहनीय है, लेकिन अप्रभावी कार्यान्वयन पुलिसकर्मियों को इसके लाभों से वंचित कर रहा है।"
नवंबर 2021 में जारी आदेश
सरकार ने 3 नवंबर, 2021 को एक सरकारी आदेश जारी किया था, जिसमें हेड कांस्टेबल के पद तक के पुलिसकर्मियों के लिए एक दिन का साप्ताहिक अवकाश मंजूर किया गया था। अगले वर्ष उप-निरीक्षकों और विशेष उप-निरीक्षकों के लिए भी इसी तरह का सरकारी आदेश जारी किया गया था लेकिन याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दोनों आदेश अब तक लागू नहीं हुए हैं।