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भारत-दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत, ऊर्जा आपूर्ति पर दोनों देशों ने कर ली डील?

भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी पर संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में दोनों देशों ने आर्थिक एवं ऊर्जा सहयोग पर एक-दूसरे के साथ मिलकर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर सहमति जताई है।

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Apr 21, 2026
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति और PM मोदी (Photo- IANS)

India and South Korea Strategic Partnership: पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट जारी तनाव (Middle East Tensions) पर टिकी है। इस बीच भारत और दक्षिण कोरिया की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है। भारत और दक्षिण कोरिया ने सोमवार को ऊर्जा संसाधन सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। दोनों देशों ने इसमें अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने एक खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपने साझा दृष्टिकोण को दोहराया।

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भारत-दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक एवं ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर

दोनों देशों ने संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक एवं ऊर्जा सहयोग उनकी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार है। यह सहयोग खुले बाजार, पारदर्शिता और नियमों पर आधारित व्यापार व्यवस्था पर टिका हुआ है, जो दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है। इसके साथ ही संयुक्त बयान में दोनों देशों ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उद्योगों और बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की आवश्यकता पर भी बल दिया है।
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। वर्तमान में भारत दक्षिण कोरिया को नैफ्था और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता है, जबकि दक्षिण कोरिया भारत को पेट्रोलियम उत्पाद और लुब्रिकेंट बेस ऑयल उपलब्ध कराता है। संयुक्त बयान में ऊर्जा व्यापार और निवेश को और मजबूत करने की योजना पर जोर दिया गया है।

ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर बनी सहमति

भारत और दक्षिण कोरिया ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने और खुले व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं। प्रमुख एलएनजी उपभोक्ता देशों के रूप में बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी आपसी सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बयान में मजबूत समुद्री ढांचे और जहाज निर्माण क्षेत्र को ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।

दोनों देशों ने जहाज निर्माण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसमें भारत में नए शिपयार्ड स्थापित करना, मौजूदा शिपयार्ड का आधुनिकीकरण, तकनीकी सहयोग और मानव संसाधन विकास शामिल है। भारत और दक्षिण कोरिया ने एक-दूसरे को ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखने का संकल्प दोहराया। साथ ही, क्षेत्रीय साझेदार देशों से अपील की गई कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को खुला और स्थिर बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि सभी देशों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित हो सके।यह संयुक्त बयान मौजूदा वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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