जिला एवं सेशन न्यायालय ने महिला थाने के 2016 के मामले में सुनाया फैसला, ननद भी दोषी, तीन साल की सजा, दोनों पर कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया
हनुमानगढ़. अवैध संबंधों में बाधा बन रही पत्नी की ब्याह के नौ माह बाद बहन के साथ मिलकर हत्या कर शव नहर में फेंकने के मामले में जिला एवं सेशन न्यायाधीश तनवीर चौधरी ने दो जनों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोषी पति को उम्रकैद तथा ननद को तीन साल कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। राज्य की ओर से लोक अभियोजक उग्रसैन नैण ने पैरवी की।
प्रकरण के अनुसार रामप्यारी पत्नी बूटा सिंह निवासी वार्ड 11 नवां ने महिला थाना पुलिस को दो अप्रेल 2016 को रिपोर्ट दी थी कि उसकी पुत्री कोडा बाई की शादी नौ माह पहले बलदेव सिंह (23) पुत्र मक्खन सिंह निवासी वार्ड 43 सुरेशिया से हुई थी। शादी में हैसियत से बढकऱ दान दहेज दिया। मगर बलदेव सिंह, उसकी माता सरेनो बाई, बहन राजो बाई उर्फ वीरपाल कौर पत्नी चरणजीत सिंह निवासी घल्लू कटेड़ा, अबोहर हाल सुरेशिया ने पुत्री कोडा बाई को एक लाख रुपए व बाइक दहेज में देने की मांग को लेकर निरंतर प्रताडि़त किया। दामाद बलदेव सिंह सात मार्च 2016 को कोडा बाई को नवां छोड़ गया। फिर नौ मार्च को अपने साथ लेकर चला गया। इसके बाद कहीं भी उसका पता नहीं चल सका। इस संबंध में जंक्शन थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इस बीच बलदेव सिंह से पूछा तो वह तथा उसके परिवार ने दस दिन में कोडा बाई को लेकर आने की बात कही। इस पर कोडा बाई की माता रामप्यारी ने महिला थाने में दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करवा दिया। इसमें अंदेशा जताया गया कि बलदेव सिंह के सुमन उर्फ सोमा निवासी सुरेशिया से अवैध संबंध हैं। इसलिए बलदेव सिंह व उसके परिजन कोडा बाई को रास्ते से हटाना चाहते थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान ननद राजो बाई उर्फ वीरपाल कौर के कब्जे से कोडा बाई की बालियां बरामद की गई। आरोपी बलदेव सिंह के कब्जे से भी कोडा बाई के गहने बरामद किए गए। गहन पड़ताल व पूछताछ के बाद मामले का खुलासा हुआ तथा आरोपियों ने कोडा बाई की हत्या करना स्वीकारा।
आरोपी बलदेव सिंह पहले नवां से कोडा बाई को घर ले गया। फिर बहन राजो बाई उर्फ वीरपाल कौर के साथ मिलकर कोडा बाई की गला घोंटकर हत्या कर दी। शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे सूरेवाला क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर में फेंक दिया। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से शव की तलाश शुरू कराई। कुछ दिन बाद नहर से शव बरामद किया गया। पुलिस ने जिला अस्पताल में मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया तथा मामले में हत्या की धारा जोड़ी।
लोक अभियोजक उग्रसेन नैण ने बताया कि बलदेव सिंह को आईपीसी की धारा 304 बी में आजीवन कारावास, 498 में तीन साल तथा 201 में तीन साल की सजा सुनाई गई। जबकि राजो बाई उर्फ वीरपाल कौर को 498 में तीन साल एवं 201 में तीन साल की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।