
रतलाम. यह सनातन धर्म ही है जो प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप देखकर उसकी पूजा के माध्यम से उसके संरक्षण और संवर्धन का संदेश देता है। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर महामंडलेस्वर स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती ने कहा कि हमने गंगा और गाय में माता के दर्शन किए है तो पीपल और वट आदि वृक्षों को पवित्र मानकर पूजा है।
भगवान श्रीकृष्ण ने तो पीपल के वृक्ष को विभूति कहा है । तुलसी का हम पूजन और परिक्रमा करते है। यह अद्वितीय अवधारणा केवल हमारे सनातन धर्म और शास्त्रों में ही मिलती है। न केवल प्रकृति बल्कि समस्त जीव को परमात्मा रूप में देखा है। तुलसीदास ने लिखा है सियाराममय सब जग जानी।
हमारा धर्म धरती से जुड़ा है
यदि हम प्रकृति से जुड़े रहे तो वह हमें परमात्मा से जोड़ देगी। हमारा धर्म धरती से जुड़ा है । प्रकृति से ही धर्म पोषित होता है । विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर दयाल वाटिका में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती ने कहा कि हम प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सजग रहने का संकल्प लेवे। पर्यावरण को नष्ट करके हम परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर सकते।
बालकों को भक्ति के संस्कार देने का आव्हान
हरिहर सेवा समिति मोहनलाल भट्ट परिवार एवं कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट की ओर से पुरुषोत्तम मास में कथा के तीसरे दिन स्वामी ने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। भक्त ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बाल्यकाल से ही अपने बालकों को भक्ति के संस्कार देने का आव्हान किया। शुक्रवार की कथा में धूमधाम से श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। स्वामी ने कहा कि बच्चों को धर्म से जोडऩे की जिम्मेदारी परिवार की है।
बच्चों को धर्म से जोडऩे की जिम्मेदारी परिवार
स्वामी ने कहा कि बच्चों को धर्म से जोडऩे की जिम्मेदारी परिवार की है । माता पिता, दादा दादी अकेले मंदिर जाने की अपेक्षा अपने बच्चों को भी साथ लेकर जाएं। दिनभर की भागमभाग के बीच कम से कम 2 मिनट तो ऐसे निकालने चाहिए कि जो केवल भगवान के लिए ही हो। उस समय आपके और भगवान के बीच कोई नहीं होना चाहिए। भगवान में मन लगाने से संसार के झंझटों से मन ऊपर उठ जाएगा। विश्वास रखिये आपके इतना करने मात्र से धीरे धीरे आचार, विचार और व्यवहार में सुखद परिवर्तन आएगा ।
भजन से भक्तिरस की वर्षा
इस अवसर पर आरडीए उपाध्यक्ष प्रवीण सोनी ने स्वामी के दर्शन कर आरती में भाग लिया। यहां तुलसी परिवार, अजित सिंह चुण्डावत, अनिल झालानी, सुरेश गोरेचा, वीडी शुक्ला, विशाल राव, प्रशांत व्यास, अखिलेश गुप्ता, सुनील पोरवाल भगत, अविनाश पोरवाल आदि बड़ी संख्या में धर्मालु शामिल हुए। संचालक सुनील भट्ट ने बड़ी देर भयी नंदलाला भजन गाकर सभी को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।