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रतलाम में महामण्डलेश्वर ने कहा आज बड़ी विडम्बना समाधान को नजरअंदाज करना

महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने कहा है कि सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि आज समस्या को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और समाधान को नजरअंदाज किया जाता है। नहीं तो दुनिया की हर समस्या का समाधान सनातन धर्म शास्त्र में उपलब्ध है।

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Mahamandaleshwar Swami Chidambaranand Saraswati news ratlam

महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने कहा है कि सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि आज समस्या को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और समाधान को नजरअंदाज किया जाता है।

रतलाम. महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने कहा है कि आज सम्पूर्ण विश्व विविध समस्याओं से आक्रांत है, भारतीय सनातन दर्शन विश्व का दिग्दर्शन करता आया है, लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि आज समस्या को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और समाधान को नजरअंदाज किया जाता है, जिससे समस्या विकराल स्वरूप में नजर आती है, नहीं तो सनातन धर्म शास्त्र में दुनिया की प्रत्येक समस्या का समाधान उपलब्ध है। सनातन धर्म और शास्त्र सम्मत आचरण भयाक्रांत विश्व को नंदनवन बना सकता है ।

हरिहर सेवा समिति मोहनलाल भट्ट परिवार एवं कालिका माता सेवा मंडल ट्स्र्ट द्वारा पुरुषोत्तम मास के अवसर पर पूज्य स्वामीजी के पावन सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का श्रीगणेश मंगलवार से दयाल वाटिका सैलाना रोड पर हुआ । कथा के प्रथम सत्र में आयोजक परिवार के मोहनलाल भट्ट, महेंद्र भट्ट, सुनील भट्ट आदि ने पोथी पूजन किया ।

विविध संस्थाओं ने किया स्वागत-वन्दन
यहां स्वामी का कलिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट, हरिहर सेवा समिति, मेहंदी कुई बालाजी मन्दिर समिति, प्रभु प्रेमी संघ, गुप्तेश्वर आश्रम, लालजी महाराज मन्दिर, महिला मंडल एवं सनातन ग्रुप परिवार की ओर से स्वागत-वन्दन किया गया। राजाराम मोतियानी, जयेश झालानी, हरीश सुरोलिया, बाबूलाल चौधरी, डॉ. एससी खंडेलवाल, डॉ.पी जागोतिया, संजय दवे, विजय शर्मा, जगदीश राव आदि ने स्वागत किया। स्वागत भाषण सुनील भट्ट ने देते हुए 15 वर्षों की कथा महोत्सव की गौरवशाली परम्परा पर प्रकाश डाला।

रतलाम के आचरण में धर्म समाहित
स्वामी ने कहा कि मंै सम्पूर्ण भारत वर्ष में कथा के लिए भ्रमण करता हूँ, लेकिन रतलाम का धर्म और संतों के प्रति जुडाव अद्भुत है । रतलाम केवल नाम की धर्मस्व नगरी नहीं है बल्कि इसके आचरण में भी धर्म परिलक्षित होता है। यहां आकर बड़ी ही प्रसन्नता होती है रतलाम की केवल नमकीन और जायकेदार भोजन में ही रूचि नहीं बल्कि भक्तिभावना और भजन में भी उतनी ही रूचि है । इस शहर ने धर्म को अपनाया है और यह शास्त्र का वचन है कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है ।

कथा से ही व्यथा का अंत
उन्होंने कहा कि हरिहर सेवा समिति रतलाम अध्यक्ष मोहनलाल भट्ट परिवार ने पुरुषोत्तम मास में वर्ष 2012 से रतलाम में श्रीमद् भागवत कथा की शुरुआत की थी, जो आज 15 वर्षों बाद भी लगातार जारी है । भट्ट परिवार इसी पावन परम्परा को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हुए रतलाम के धर्मस्व नगरी के नाम को सार्थकता प्रदान करेगा । इस परिवार ने शहर को भगवान की निरंतर कथाओं और संतों से जोड़ा है । जो परम सौभाग्य की बात है । कथा के श्रवण से ही जीवन की व्यथा का अंत होता है।

कलश यात्रा में भक्त जमकर थिरके
इसके पूर्व भागवत जी पोथी एवं कलश यात्रा भागवत कृपा दयाल वाटिका से निकली । जिसमें महिलाएं डीजे और बैंड की मधुर सेर लहरियों के साथ मंगल कलश लिए एक सी वेशभूषा में शामिल हुई । भक्तजन भजनों और ढोल की थाप पर नृत्य करते चल रहे थे । मीडिया प्रभारी राकेश पोरवाल ने बताया कि से 9 जून तक आयोजित कथा महोत्सव का समय प्रतिदिन शाम 4 बजे से रहेगा। कथा श्रवण के लिए देश के विभिन्न स्थाओं से श्रद्धालु रतलाम पहुंच रहे है।