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मेडिकल कॉलेज शिक्षकों ने सीने पर डाइंग कैडर के पोस्टर लगा जताया रोष

- आंदोलन का आगाज: सामूहिक अवकाश रखकर सरकार के कदम को बताया अनुचित मेडिकल कॉलेज शिक्षकों ने सीने पर डाइंग कैडर के पोस्टर लगा जताया रोष

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श्रीगंगानगर. इलाके के सरकारी मेडिकल कॉलेज शिक्षकों ने प्रदेश भर आंदोलन के तहत सोमवार को कॉलेज परिसर में सामूहिक अवकाश लेकर अपना रोष जताया। कॉलेज कैम्पस में मेडिकल शिक्षकों ने अपने सीने पर डाइंग कैडर के पोस्टर लगाकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस आंदोलन की शुरूआत होने से मेडिकल कॉलेज में अध्यापन की प्रक्रिया ठप हो गई हैं। वहीं जिला चिकित्सालय में भी रोगियों का चेकअप की सेवाएं भी इन छब्बीस मेडिकल कॉलेज शिक्षकों ने नहीं की।
राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन की ओर से पूरे प्रदेश में करीब सात सौ चिकित्सक शिक्षक आंदोलन की राह पर आ गए हैं। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डा. दिवाकर वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने बजट सत्र में यह घोषणा की थी कि राजमेस में भी राज्य सेवा नियमों का पालना किया जाएगा, लेकिन वित्त विभाग व राजमेस ने इन नियमों को वर्तमान में कार्यरत सभी चिकित्सक शिक्षकों पर लागू ना कर एक अगस्त 2024 के बाद नवनियुक्त होने वाले चिकित्सक शिक्षकों पर ही इस नियम को लागू करने और वर्तमान में कार्यरत सभी चिकित्सक शिक्षकों को डाइंग केडर घोषित करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ राज्य के सभी सत्रह मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक शिक्षकोें ने पहले दिन सोमवार को अपनी नाराजगी जताते हुए सरकार तक संदेश भिजवाया। अब मंगलवार को अनिश्चितकाल तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। प्रदर्शन करने के दौरान जिला शाखा अध्यक्ष वर्मा के अलावा उपाध्यक्ष डा. बृजेश महावर, महासचिव डा. सुरेश शर्मा, प्रज्ञान ग्रोवर, डा. डीके देवरा, प्रमोद, डा. चन्द्रकांत कुम्बले, डा. सुनीता सहारण, डा. करण शर्मा, डा. साहिल मिडढा आदि मौजूद थे।

क्या है डाइंग कैडर

चिकित्सक शिक्षक डा.महावर ने बताया कि डाइंग कैडर का अर्थ है मरता हुआ पद। इसके तहत नया पद सृजित नहीं किया जाएगा। जो पद खाली होगा, वह पद ही समाप्त हो जाएगा। सेवा शर्ते एवं सेवा परिलाभ भी निगम एवं बोर्ड की तरह प्रतिबंधित होंगे। विदित रहे कि यह डाइंग कैडर कुछ अर्से पहले प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में समायोजित किया गया था, तब यह फार्मूला सरकार ने निकाला था।

प्रभारी मंत्री को भी बताई पीड़ा

इधर, जयपुर में गंगानगर युवा मोर्चा व मेडिकल कॉलेज बनाओ टीम जिलाध्यक्ष देवकरण नायक और प्रिंसिपल भजन सिंह घारु ने जिले के प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा को ज्ञापन दिया। इसमें बताया कि श्रीगंगानगर में राजकीय मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की कमी है। एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए पूरे प्रोफेसर नहीं है तथा ना ही मैनेजमेंट संभालने के लिए पूरा स्टाफ है।

Published on:
22 Jul 2024 08:41 pm
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