
नरेंद्र मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल में किसकी कुर्सी जा सकती है और किसकी लॉटरी लग सकती है, इसे लेकर कुछ दिनों से अटकलों का बाजार गरम है। इस कड़ी में एक नया नाम जुड़ गया है। यह नाम हैं धर्मेंद्र यादव का। अटकलें लग रही हैं कि उनकी कुर्सी जा सकती है।
2024 में नरेंद्र मोदी ने जब तीसरी बार अपनी कैबिनेट बनाई तो दूसरी सरकार से 37 मंत्रियों को शामिल नहीं किया था। इनमें 18 चुनाव हार गए थे और सात कैबिनेट मंत्री थे। इनमें स्मृति ईरानी, अनुराग ठाकुर और नारायण राणे बड़े नाम थे। स्मृति तो राहुल गांधी से चुनाव हार गई थीं, लेकिन बाकी दोनों जीतने के बाद भी मोदी कैबिनेट का हिस्सा नहीं बन सके थे। इन तीन के अलावा पुरुषोत्तम रुपाला, अर्जुन मुंडा, आरके सिंह और महेंद्र नाथ पांडे थे जो मोदी-2 में कैबिनेट मंत्री थे, पर अगली सरकार में नहीं रहे।
बीजेपी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि नरेंद्र मोदी कई बातों को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों को चुनने या हटाने का फैसला लेते हैं। चुनाव में जीत या हार इनमें से एक बहुत छोटा कारण है। कहा जाता है कि प्रधानमंत्री अपने नेटवर्क के जरिये अपने सभी सांसदों के कामकाज पर नजर रखते हैं। उनके बारे में मिली प्रतिक्रिया उन्हें सरकार में शामिल करने संबंधी फैसला लेने का एक प्रमुख आधार बनती है। इसी तरह मंत्रियों को हटाने का एक आधार उनका रिपोर्ट कार्ड भी बनता है।
इसी सिलसिले में आज-कल यह सवाल दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है कि नरेंद्र मोदी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के मंत्री भूपेंद्र यादव की कुर्सी छीन लेंगे क्या? इसकी ताजा वजह यह है कि सरकार ने निजी सचिव (पीएस) सहित उनके करीबी चार अफसरों को उनके दफ्तर से हटा दिया है। ये अफसर उनके निजी स्टाफ का हिस्सा थे। बताया जा रहा है कि एक साथ किसी मंत्री के सभी निजी स्टाफ को हटा देने की कार्रवाई मोदी सरकार पहली बार हुई है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई किसी खुफिया रिपोर्ट के आधार पर हुई है। सरकार के इस अप्रत्याशित कदम को मंत्रालय में कुछ गड़बड़ी की आशंका और 'सफाई' के मद्देनजर उठाया गया कदम माना जा रहा है। इसीलिए कुछ नेता इसे मोदी कैबिनेट में होने वाले संभावित फेरबदल से भी जोड़ कर देख रहे हैं।
धर्मेंद्र यादव को सरकार से संगठन में लाने की भी अटकलें हैं। इन अटकलों को हवा इसलिए भी मिली कि 7 जुलाई की रात बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन को अचानक दिल्ली बुलाया गया। वह जम्मू गए थे। वहां उनका कार्यक्रम था और उन्हें वैष्णो देवी के दर्शन के लिए भी जाना था। लेकिन, उन्हें किसी आपात बैठक के लिए बुला लिया गया। नितिन नवीन की टीम भी अभी बननी है। माना जा रहा है कि सरकार से कुछ नेताओं को संगठन में लाया जा सकता है और उनकी जगह दूसरे नेताओं को सरकार में शामिल किया जा सकता है।
अमित शाह के करीबी माने जाने वाले धर्मेद्र यादव सरकार में रहते हुए भी हाल में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारी निभाते रहे हैं। पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में भी उन्हें राज्य का प्रभारी बनाया गया था। चुनाव के बाद टीएमसी से 20 सांसदों के एनडीए खेमे में आने के घटनाक्रम में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। ऐसे में उन्हें पार्टी के काम में पूरी तरह लगाने की अटकलें भी लग रही हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं और पार्टी इनकी तैयारियों में लग गई है।
मंत्री बनने के लिए जातीय और सामाजिक समीकरण, चुनाव से जुड़ी बातें, प्रधानमंत्री, अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष के साथ की केमिस्ट्री जैसे फैक्टर भी अहम भूमिका निभाते हैं। लगातार विवादित बयान देते रहने के बावजूद गिरिराज सिंह का मोदी-1 से ही लगातार मंत्री बने रहना इस नजरिए से देखा जा सकता है।
एक और बड़ा फैक्टर है काम करने के साथ-साथ सरकार की सकारात्मक छवि को मजबूत करना। इस काम को बखूबी करने वाले कई नेता लगातार मंत्री बने हुए हैं। नितिन गडकरी, अश्विनी वैष्णव जैसे मंत्री इस श्रेणी में रखे जा सकते हैं।
ट्विटर (अब 'एक्स') से विवाद में सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने के बाद रवि शंकर प्रसाद की विदाई (2021) और न्यायपालिका के लिए धमकी भरे बयान देने के बाद कानून मंत्री के पद से किरण रिजिजू को हटाए जाने को सरकार की छवि खराब करने के नतीजे के रूप में देखा जा सकता है।