श्रीगंगानगर. शहर के नेहरानगर क्षेत्र में सीवर लाइन लीकेज की समस्या ने अब गंभीर और भयावह रूप धारण कर लिया है। सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमराने से गंदा पानी घरों के आगे ओवरफ्लो होकर सड़कों और गलियों में फैल रहा है। इसके चलते सैकड़ों मकानों की नींव और दीवारें प्रभावित हो रही हैं, वहीं गंदगी […]
श्रीगंगानगर. शहर के नेहरानगर क्षेत्र में सीवर लाइन लीकेज की समस्या ने अब गंभीर और भयावह रूप धारण कर लिया है। सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमराने से गंदा पानी घरों के आगे ओवरफ्लो होकर सड़कों और गलियों में फैल रहा है। इसके चलते सैकड़ों मकानों की नींव और दीवारें प्रभावित हो रही हैं, वहीं गंदगी और बदबू के बीच रहना स्थानीय लोगों के लिए मजबूरी बन चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यहां रहना दूभर हो गया है। सीवर का गंदा पानी लगातार घरों में घुस रहा है, जिससे घरेलू सामान खराब हो रहा है और मकानों को संरचनात्मक नुकसान पहुंच रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि अब पेयजल भी दूषित होकर आ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
शिकायतें कीं, मिला सिर्फ आश्वासन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे लंबे समय से नगर विकास न्यास (यूआईटी) और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराते आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले। स्थायी समाधान नहीं होने से नाराज क्षेत्रवासियों ने रोष मार्च निकालते हुए यूआईटी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले करीब दो वर्षों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सीवर लाइन की सफाई और पानी निकासी की जिम्मेदारी जिस ठेका कंपनी को दी गई थी, उसने केवल औपचारिकताएं पूरी कीं। समय पर सफाई और मरम्मत नहीं होने से सीवर लीकेज आम समस्या बन गई है।
पेयजल लाइनें भी प्रभावित, स्वास्थ्य संकट गहराया
सीवर लीकेज के चलते पीने के पानी की लाइनें भी प्रभावित हो रही हैं। गंदा पानी पेयजल पाइप लाइनों में मिल रहा है, जिससे पूरे इलाके में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है।
हर दो माह बाद प्रदर्शन करने की नौबत
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि हर दो माह में सीवर लाइन की सफाई नहीं होती, तो उन्हें यूआईटी के समक्ष प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। श्रमिक बांकेलाल ने बताया कि वह मजदूरी पर जाने की बजाय अपने घर को सीवर के पानी से बचाने के लिए परिवार सहित मोहल्लेवासियों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुआ। उन्होंने कहा कि रोज़गार छोड़कर घर बचाना उनकी मजबूरी बन गई है।
13 साल बाद भी अधूरा सीवरेज प्रोजेक्ट
विदित रहे कि वर्ष 2013 में नगर विकास न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष ज्योति कांडा के कार्यकाल में नेहरानगर में सीवरेज प्रोजेक्ट के प्रथम चरण की शुरुआत हुई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 13 साल बीत जाने के बावजूद क्षेत्र में सीवर लाइनों से सुचारु रूप से पानी निकासी की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है।
तब यूईएम कंपनी ने बिछाई थी पाइप लाइन
करीब 13 वर्ष पहले सीवर प्रोजेक्ट के तहत ठेका कंपनी यूईएम द्वारा नेहरानगर में सीवर लाइन बिछाई गई थी। बाद में यह कंपनी यहां से चली गई। इसके बाद इन लाइनों की मरम्मत और देखभाल के लिए यूआईटी ने तोशिबा वाटर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड से अनुबंध किया। आरोप है कि इस कंपनी ने पाइप लाइनों की नियमित सफाई कराने की बजाय केवल शिकायत मिलने पर ही सीमित कार्रवाई की। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कंपनी ने सीवर सफाई के कार्य को कभी गंभीरता से नहीं लिया, जिसका खामियाजा आज पूरा इलाका भुगत रहा है।