NIA
चेन्नई. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 12 जून को एनआईए मामलों को संभालने वाली विशेष अदालत में एक आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप पत्र में विशेष उप-निरीक्षक (एसएसआई) विल्सन की हत्या में सात संदिग्धों को आरोपित किया गया है, जिनकी 8 जनवरी, 2020 को कन्याकुमारी के कलियाक्कविलै में हत्या कर दी गई थी। आरोप पत्र में एनआईए के इस निष्कर्ष को रेखांकित किया गया है कि एसएसआई विल्सन की हत्या, ख्वाजा मोइद्दीन और उसके सहयोगियों द्वारा आतंक फैलाने के लिए रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। एनआईए की विस्तृत जांच और तत्पश्चात आरोप-पत्र में इन आतंकवादी गतिविधियों से उत्पन्न खतरे की गंभीरता तथा अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारतीय प्राधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला गया है।
यह था मामला
8 जनवरी 2020 की रात को एसएसआई विल्सन तमिलनाडु-केरल सीमा पर कलियाक्कविलै में एक चौकी पर ड्यूटी पर थे, उसी दौरान दो हथियारबंद हमलावरों ने उनको गोली मार दी और चाकू घोंपकर मार डाला। अब्दुल शमीम और वाई तौफीक के रूप में पहचाने गए हमलावर अपराध करने के बाद घटनास्थल से भाग गए। कन्याकुमारी पुलिस ने संदिग्धों की तुरंत पहचान की और सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया जिनमें अब्दुल शमीम (30), तौफीक (27), खाजा मोइद्दीन, (53), महबूब पाशा (48) , एजाज पाशा (46), जफर अली, (26) और सिक्काबुद्दीन (36) का नाम शामिल है। पुलिस के अनुसार विल्सन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया था, जिनका उद्देश्य लोगों और पुलिस के बीच आतंक पैदा करना था। लोगों के आक्रोश के बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया, जिसने संदिग्धों के आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने का खुलासा किया था।