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राखी नहीं, राष्ट्रभावना का बंधन, प्रदेश में बढ़ेगा कारोबार : इस रक्षाबंधन 1000 करोड़ का स्वदेशी व्यापार

इस बार भाई की कलाई पर बंधने वाला रक्षासूत्र सिर्फ रिश्तों की डोर नहीं, बल्कि देशभक्ति, आत्मनिर्भरता और स्थानीय हुनर का संदेश भी दे रहा है। बाजार में 'विकसित भारत;, 'मोदी गारंटी, 'ब्रह्मोस', 'आत्मनिर्भर भारत', 'वोकल फॉर लोकल', 'भारत गौरव', 'नारी वंदन', 'लखपति दीदी', 'नमामि गंगे', 'राष्ट्र रक्षा सूत्र' और 'अमृतकाल' जैसी थीम वाली राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
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Aug 26, 2026
Rakhi
राखी नहीं, राष्ट्रभावना का बंधन

ग्वालियर. इस बार भाई की कलाई पर बंधने वाला रक्षासूत्र सिर्फ रिश्तों की डोर नहीं, बल्कि देशभक्ति, आत्मनिर्भरता और स्थानीय हुनर का संदेश भी दे रहा है। बाजार में 'विकसित भारत;, 'मोदी गारंटी, 'ब्रह्मोस', 'आत्मनिर्भर भारत', 'वोकल फॉर लोकल', 'भारत गौरव', 'नारी वंदन', 'लखपति दीदी', 'नमामि गंगे', 'राष्ट्र रक्षा सूत्र' और 'अमृतकाल' जैसी थीम वाली राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक, इस वर्ष मध्यप्रदेश में राखियों का कारोबार करीब 1,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 33 फीसदी अधिक है। मिठाई, उपहार, वस्त्र और अन्य त्योहार सामग्री को जोड़ने पर रक्षाबंधन का बाजार 1,200 करोड़ रुपए से अधिक होने की उम्मीद है।

कई शहरों की कला राखियों में…
बाजार में देश के अलग-अलग हिस्सों की कला और संस्कृति से जुड़ी राखियां भी पहुंची हैं। नागपुर की खादी, जयपुर की सांगानेरी कला, पुणे की सीड राखी, कोलकाता की जूट, असम की चाय पत्ती, मुंबई की सिल्क-मोती और जनजातीय हस्तकला से बनी बांस की राखियां खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं। इससे खादी बुनकरों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे कारीगरों को भी बाजार मिल रहा है।

राखी में स्नेह के साथ राष्ट्रीय संदेश
इस बार डिजाइन और थीम ने राखियों की खरीदारी को नया अंदाज दिया है। युवाओं और बच्चों में 'ब्रह्मोस' और 'राष्ट्र रक्षा सूत्र' राखियों को लेकर उत्साह है। वहीं 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी राखियां देश के विकास और स्वदेशी भावना को दर्शा रही हैं। कैट के अनुसार, मध्यप्रदेश के बाजारों में चीनी राखियों की मांग नगण्य है और भारतीय उत्पादों ने मजबूत पकड़ बनाई है।

कारोबार बढ़ने की उम्मीद
इस वर्ष रक्षाबंधन पर बाजार में स्वदेशी उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। आगामी त्योहारों पर भी भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर 'स्वदेशी अपनाओ-भारत बढ़ाओ' अभियान को मजबूत करना चाहिए। इस बार प्रदेश में कुल मिलाकर 1,200 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है।
भूपेन्द्र जैन, प्रदेश अध्यक्ष, कैट मध्यप्रदेश

Updated on:
26 Aug 2026 06:22 pm
Published on:
26 Aug 2026 06:22 pm