Operation Muskaanनरसिंहपुर। जिले में गुमशुदा एवं अपहृत बच्चों सहित लापता बालिग व्यक्तियों की तलाश और सुरक्षित पुनर्वास के लिए ऑपरेशन मुस्कान के सार्थक परिणाम लगातार मिल रहे है। पिछले एक वर्ष में जिले की पुलिस ने 225 नाबालिग बालिकाएँ, 39 नाबालिग बालक, 726 महिलाएँ और 389 पुरुषों को सुरक्षित दस्तयाब किया है। इनमें से बड़ी […]
Operation Muskaanनरसिंहपुर। जिले में गुमशुदा एवं अपहृत बच्चों सहित लापता बालिग व्यक्तियों की तलाश और सुरक्षित पुनर्वास के लिए ऑपरेशन मुस्कान के सार्थक परिणाम लगातार मिल रहे है। पिछले एक वर्ष में जिले की पुलिस ने 225 नाबालिग बालिकाएँ, 39 नाबालिग बालक, 726 महिलाएँ और 389 पुरुषों को सुरक्षित दस्तयाब किया है। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु व अन्य राज्यों से खोजकर वापस लाया गया। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान ने कई परिवारों में फिर से खुशियाँ लौटा दी हैं।
थाना स्तर पर विशेष टीमें
अभियान के तहत हर थाना क्षेत्र में विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने सक्रिय रूप से सर्च अभियान चलाकर गुमशुदा बच्चों और व्यक्तियों के ठिकानों की पतासाजी की। लगातार प्रयासों से बीते तीन माह में 57 नाबालिग बालिकाएँ, 13 बालक, 153 महिलाएँ और 104 पुरुष, वहीं एक माह में 32 नाबालिग बालिकाएँ, 8 बालक, 40 महिलाएँ और 14 पुरुष दस्तयाब किए गए।
स्कूलों में जागरूकता अभियान
पुलिस अधीक्षक डॉ. मीना, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया, जिले के एसडीओपी और थाना प्रभारी लगातार स्कूलों में पहुँचकर बच्चों से संवाद कर रहे हैं। बच्चों को सुरक्षा, शिक्षा एवं भविष्य से जुड़े जोखिमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
घटनाओं की यह हैं प्रमुख
पारिवारिक कलह, अभिभावकों की उपेक्षा या अत्यधिक डांट-फटकार, प्रेम-प्रसंग, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, नशे की लत, पढ़ाई का दबाव, ऑनलाइन गेमिंग की लत और झूठे प्रलोभन प्रमुख रूप से शामिल हैं। कई बच्चे अनुभवहीनता और भावनात्मक उतावलेपन के चलते गलत निर्णय लेकर घर छोड़ देते हैं।
समाज की भी जिम्मेदारी
नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. मीना ने कहा है कि बच्चों को सुरक्षित रखने में परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी बराबर है। हर नागरिक अपने आसपास के बच्चों में होने वाले बदलावों पर ध्यान दे और उन्हें सही मार्गदर्शन दे।
इन उपायों से रोका जा सकता है खतरा
बच्चों से प्रतिदिन संवाद रखें और उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनें।
सोशल मीडिया, गलत संगत और ऑनलाइन खतरों के प्रति सजग करें।
मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर सतर्क निगरानी रखें।
बच्चों के मित्र, दिनचर्या और गतिविधियों की जानकारी रखें।
घर का वातावरण सौहार्दपूर्ण और भयमुक्त बनाएं।
पढ़ाई को लेकर अनावश्यक दबाव न डालें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि या बहकावे की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
आपात स्थिति में डायल 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला हेल्पलाइन 181 पर संपर्क करें।